सीजी भास्कर, 10 जून : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA Dabri Nirman) आज छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और वनांचल इलाकों में गरीब आदिवासी परिवारों के लिए न केवल आजीविका का सहारा बन रही है, बल्कि स्थायी जल स्रोतों का निर्माण कर खेती-किसानी की तस्वीर भी बदल रही है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल विकासखंड से सफलता की एक ऐसी ही सुखद तस्वीर सामने आई है, जहाँ मनरेगा के तहत बनी एक छोटी सी डबरी (छोटा तालाब) ने वनांचल के किसानों की सूखी और बंजर पड़ी जमीन को सिंचित कर उनकी आमदनी में बंपर इजाफा कर दिया है।
इस जल संरक्षण कार्य से न केवल एक परिवार खुशहाल हुआ है, बल्कि आसपास के पूरे इलाके का वाटर लेवल (भू-जल स्तर) भी सुधर गया है। यह पूरा बदलाव विकासखंड कसडोल के सुदूर ग्राम पंचायत मुढ़ीपार के आश्रित ग्राम भोथाही (MGNREGA Dabri Nirman) में देखने को मिला है। यह गाँव मुख्य रूप से अनुसूचित जनजाति बाहुल्य है, जहाँ के लोग अपनी आजीविका के लिए वनोपज, पारंपरिक खेती और मनरेगा मजदूरी पर ही पूरी तरह निर्भर रहते हैं।
जब वन अधिकार पट्टे और मनरेगा का मिला साथ
गांव की रहने वाली अनुसूचित जनजाति परिवार की महिला किसान सवित्री धुर्नहार के पास वन अधिकार पट्टे की जमीन तो थी, लेकिन पानी का कोई साधन न होने के कारण उनकी भूमि बंजर जैसी पड़ी थी। साल 2025 में सवित्री ने अपनी किस्मत बदलने का फैसला किया और ग्राम पंचायत मुढ़ीपार की ग्रामसभा में अपनी वन पट्टा भूमि पर मनरेगा के तहत डबरी निर्माण की मांग रखी।
ग्राम पंचायत की पहल पर जनपद पंचायत कसडोल के तकनीकी सहायक के मार्गदर्शन में डबरी निर्माण का प्रस्ताव, नक्शा, खसरा और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार कर जिला पंचायत भेजे गए। जिला पंचायत से प्रशासकीय मंजूरी मिलते ही सवित्री की जमीन पर डबरी निर्माण का काम शुरू हुआ, जिसने आज पूरे गाँव के लिए पानी के संकट को दूर कर दिया है।
एक डबरी से सिंचित हो रही 3 एकड़ जमीन
सवित्री धुर्नहार की जमीन पर डबरी (MGNREGA Dabri Nirman) बनने के बाद अब उनकी लगभग 3 एकड़ कृषि भूमि सीधे तौर पर सिंचित हो रही है। सवित्री ने बताया कि पहले खरीफ फसल के दौरान बारिश की कशमकश और पानी के अभाव में फसल पूरी तरह तैयार नहीं हो पाती थी और मेहनत डूब जाती थी। लेकिन अब डबरी में साल भर पर्याप्त पानी रहने से खेतों को समय पर सिंचाई मिल रही है, जिससे फसल की पैदावार और उत्पादन दोनों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
पड़ोसी किसानों के खेतों की भी बुझी प्यास
इस मनरेगा डबरी का फायदा सिर्फ सवित्री को ही नहीं मिल रहा है, बल्कि यह सामुदायिक आजीविका का बड़ा केंद्र बन गई है। सवित्री की कृषि भूमि के आसपास स्थित अन्य आदिवासी कृषकों जैसे मनीराम, नेहरू और लक्ष्मण के खेतों को भी अब इसी डबरी के पानी से सींचा जा रहा है। पानी की सुनिश्चित उपलब्धता होने से इन सभी किसानों की फसलें अब समय पर पककर तैयार हो रही हैं।
हितग्राही सवित्री धुर्नहार और उनके साथी किसानों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि वन अधिकार पट्टा मिलने से उन्हें शासन की कई बड़ी योजनाओं का एक साथ सीधा लाभ मिला है। इस एक सुधार ने उनके परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना दिया है और अब उन्हें काम की तलाश में गाँव छोड़कर पलायन भी नहीं करना पड़ रहा है।
वाटर रिचार्जिंग से पर्यावरण को भी मिला फायदा
कसडोल जनपद पंचायत के अधिकारियों के मुताबिक, वनांचल क्षेत्रों में मनरेगा के तहत डबरियों के निर्माण का दोहरा फायदा मिल रहा है। एक तरफ जहाँ किसानों को सिंचाई के लिए सीधा पानी मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ बारिश का पानी इन डबरियों में जमा होने से आसपास के पूरे इलाके में ‘वाटर रिचार्ज’ हो रहा है। इससे क्षेत्र के कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर भी बढ़ गया है, जिससे गर्मियों के दिनों में होने वाली पेयजल किल्लत से भी ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल रही है।



