सीजी भास्कर, 28 मई। देशभर के छोटे कारोबारों में इस बार अलग ही उत्साह देखने को मिल (MSME Growth) रहा है। बाजार में लगातार बढ़ती लागत और महंगाई के बावजूद छोटे व्यापारियों के चेहरे पर भरोसा साफ नजर आ रहा है। कारोबारी इलाकों में अब फिर से रौनक लौटती दिखाई दे रही है और कई छोटे उद्योग पहले के मुकाबले तेजी से आगे बढ़ते दिख रहे हैं।
कोरोना के बाद लंबे समय तक संघर्ष करने वाले छोटे कारोबार अब मजबूत वापसी करते नजर आ रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों की मुश्किलों के बाद अब बाजार में मांग बढ़ी है और डिजिटल तरीके अपनाने से काम में भी तेजी आई है। यही वजह है कि आने वाले साल को लेकर भी छोटे उद्योगों में उम्मीद काफी मजबूत दिखाई दे रही है।
छोटे कारोबारों ने दर्ज की बड़ी बढ़त : MSME Growth
एशिया पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े एक सर्वे में सामने आया है कि भारत के करीब 80 प्रतिशत छोटे कारोबारों ने साल 2025 में ग्रोथ दर्ज की। यह आंकड़ा एशिया प्रशांत क्षेत्र के औसत से काफी ज्यादा बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना काल के बाद पहली बार छोटे कारोबार इतने मजबूत तरीके से आगे बढ़ते दिखाई दिए हैं।
अगले साल को लेकर कारोबारियों में भरोसा
सर्वे में शामिल ज्यादातर छोटे कारोबारियों ने कहा कि उन्हें आने वाले समय में कारोबार और बढ़ने की उम्मीद है। करीब 87 प्रतिशत कारोबारियों का मानना है कि साल 2026 में उनका व्यापार और तेज गति से आगे बढ़ेगा। वहीं बड़ी संख्या में कारोबारियों ने देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बताया है।
तकनीक से कारोबार को मिला सहारा
रिपोर्ट में बताया गया कि नई तकनीक अपनाने से छोटे कारोबारों को काफी फायदा मिला (MSME Growth) है। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन प्रचार और बेहतर सप्लाई व्यवस्था ने कारोबार बढ़ाने में मदद की। खासतौर पर युवा कारोबारी तेजी से तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे ग्राहकों तक पहुंच आसान हुई है और कमाई भी बढ़ी है।
महंगाई अभी भी बनी बड़ी परेशानी
हालांकि कारोबारों की रफ्तार तेज हुई है, लेकिन बढ़ती लागत अब भी चिंता का कारण बनी हुई है। करीब 42 प्रतिशत कारोबारियों ने माना कि महंगाई और कच्चे माल की बढ़ती कीमतें उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। लगातार तीसरे साल इसे सबसे बड़ा दबाव माना गया है।
कारोबार बढ़ाने के लिए बढ़ी फाइनेंस की जरूरत
छोटे कारोबारों के बीच बाहरी फाइनेंस की मांग भी तेजी से बढ़ी है। कई कारोबारियों को व्यापार बढ़ाने और संचालन के लिए अतिरिक्त पैसों की जरूरत पड़ी। हालांकि अच्छी बात यह रही कि बड़ी संख्या में कारोबारियों ने माना कि अब पहले की तुलना में फाइनेंस हासिल करना आसान हुआ है।




