सीजी भास्कर, 6 सितंबर : ग्रामीण बच्चों की शिक्षा में नवाचार और तकनीक का इस्तेमाल कर बदलाव लाने वाली शिक्षिका सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान (National Teacher Award) से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इस वर्ष छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान पाने वाली वह एकमात्र शिक्षिका हैं।
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नवाचार से ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई बनी आसान
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक स्थित शासकीय प्राथमिक शाला खिचरी में पदस्थ सुनीता यादव ने ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के बच्चों के लिए पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों से अलग प्रयोग किए। उन्होंने तकनीक, साहित्य, रचनात्मक गतिविधियों और अनुभव आधारित शिक्षण को कक्षा का हिस्सा बनाया। उनके प्रयासों के लिए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान (National Teacher Award) दिया गया है।
लघु फिल्मों से लेकर स्मार्ट क्लास तक प्रयोग
सुनीता यादव कठिन विषयों को आसान बनाने के लिए विद्यार्थियों के साथ मिलकर लघु फिल्में तैयार करती हैं। इन फिल्मों का इस्तेमाल कक्षा में शिक्षण के दौरान किया जाता है। इसके अलावा दीक्षा ऐप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग और स्मार्ट क्लास जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जाता है।
पढ़ाई में कमजोर बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए खेल-खेल में शिक्षा समेत कई गतिविधियां कराई जाती हैं। बच्चों को डिजिटल साक्षरता और रोजगार से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है। उनके प्रयासों में पोषण और स्वास्थ्य को भी शामिल किया गया है।
बच्चों के पोषण पर भी देती हैं ध्यान
सुनीता यादव अपने खर्च पर विद्यार्थियों को नियमित रूप से दूध उपलब्ध कराती हैं। इसके साथ ही वह समाज के लोगों को भी बच्चों के लिए भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए उनके स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान देना भी जरूरी है।
शिक्षिका के इन प्रयासों ने राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान (National Teacher Award) के लिए उनकी दावेदारी को मजबूत किया। उनके काम का दायरा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। वह बच्चों को जीवन से जुड़ी सीख देने के लिए विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां भी कराती हैं।
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आदिवासी बच्चों के लिए लगाया निशुल्क समर कैंप
शिक्षा से दूर और कमजोर वर्ग के बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए सुनीता यादव ने बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप आयोजित किया। यहां पढ़ाई के साथ बच्चों में सीखने की रुचि विकसित करने पर जोर दिया गया।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्राथमिक विद्यालयों में हुए बदलाव और उसके प्रभावों पर शोध पत्र भी तैयार किया है। विद्यार्थियों में पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए सीड बॉल तैयार करने और सैनिकों के लिए राखी बनाने जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया।
पहले भी मिल चुके हैं राज्य और साहित्यिक सम्मान
सुनीता यादव को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में पहले भी सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2024 में उन्हें राज्य शिक्षक सम्मान मिला था। वर्ष 2025 में साहित्य के क्षेत्र में पंडित मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण से सम्मानित किया गया। अब राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान (National Teacher Award) ने उनके शैक्षणिक नवाचारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चयनित शिक्षकों से मुलाकात की थी। इस दौरान सुनीता यादव ने ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों के लिए किए जा रहे शिक्षण कार्य और तकनीकी नवाचारों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने उनके नियमित अध्यापन के साथ तकनीक और रचनात्मक माध्यमों के इस्तेमाल की सराहना की।
शिक्षक परिवार से निकलीं, शिक्षा को बनाया कर्मक्षेत्र
सुनीता यादव का जन्म महासमुंद जिले के सांकरा में शिक्षक परिवार में हुआ। उन्होंने पिथौरा से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर और पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय से बीएड किया। इसके बाद उन्होंने शिक्षण को अपना कर्मक्षेत्र बनाया।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ सारंगढ़-बिलाईगढ़ और छत्तीसगढ़ के लिए भी गौरव का विषय है। छोटे ग्रामीण विद्यालय में नवाचार और तकनीक के जरिए शिक्षा को बेहतर बनाने की उनकी पहल दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
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