सीजी भास्कर, 1 जून। छत्तीसगढ़ में राजपूत समाज की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों के केंद्र में रही करणी सेना के भीतर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। कुछ दिन पहले डॉ. राज शेखावत की क्षत्रिय करणी सेना छोड़कर कालवी विचारधारा वाली राजपूत करणी सेना में शामिल हुए अभिषेक कुमार सिंह ने दावा किया था कि उनके साथ प्रदेश के 220 पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी संगठन छोड़ चुके हैं। अब इस पूरे मामले में संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया। (Open conflict in Karni Sena)
अभिषेक सिंह के दावों को बताया भ्रामक : Open conflict in Karni Sena
क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने अभिषेक सिंह के दावों को तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिषेक सिंह कभी भी संगठन के विधिवत नियुक्त और अधिकृत प्रदेश अध्यक्ष नहीं रहे। विशेष परिस्थितियों में उन्हें केवल सीमित अवधि के लिए कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।राष्ट्रीय नेतृत्व के अनुसार छत्तीसगढ़ में संगठन के अधिकृत प्रदेश अध्यक्ष पहले भी वीरेंद्र सिंह तोमर थे और वर्तमान में भी वही इस पद पर कार्यरत हैं।
अनुशासनहीन गतिविधियों पर हुई कार्रवाई
संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अभिषेक सिंह और उनके कुछ सहयोगी संगठन के संविधान, अनुशासन और निर्धारित कार्यप्रणाली के विपरीत गतिविधियां संचालित कर रहे थे। इसकी समीक्षा के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश कार्यकारिणी को भंग करने का निर्णय लिया था।संगठन का दावा है कि यह निर्णय संगठनात्मक व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था।
220 पदाधिकारियों के साथ छोड़ने के दावे पर सवाल
राष्ट्रीय कार्यालय ने अभिषेक सिंह के उस दावे को भी खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने अपने साथ 220 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के संगठन छोड़ने की बात कही थी।स्पष्टीकरण में कहा गया है कि अभिषेक सिंह के पास संगठन की वास्तविक सदस्य संख्या का अधिकृत रिकॉर्ड नहीं था। ऐसे में वे पूरे प्रदेश संगठन की ओर से कोई अधिकृत दावा करने की स्थिति में नहीं थे।
संगठन का कहना है कि अधिकांश जिला, तहसील, संभाग और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी आज भी क्षत्रिय करणी सेना के साथ जुड़े हुए हैं और राष्ट्रीय नेतृत्व तथा संगठन की विचारधारा के प्रति निष्ठावान हैं।
तोमर बंधु प्रकरण के बाद बढ़े मतभेद : Open conflict in Karni Sena
जानकारी के अनुसार प्रदेश में चर्चित तोमर बंधुओं के मामले को लेकर चलाए गए आंदोलन के दौरान संगठन के भीतर वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आए थे। उस समय प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन अभिषेक सिंह और उनकी टीम कर रही थी।आंदोलन के दौरान संगठन को विरोध और आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था। इसके बाद संगठन के भीतर दो अलग-अलग वैचारिक धाराएं विकसित होने लगीं, जिससे मतभेद और गहरे हो गए।
कालवी विचारधारा वाली करणी सेना में शामिल हुए अभिषेक
बाद में अभिषेक सिंह ने अपनी टीम के साथ डॉ. राज शेखावत के नेतृत्व वाली क्षत्रिय करणी सेना से अलग होने की घोषणा कर दी। इसके बाद उन्होंने कालवी विचारधारा वाली राजपूत करणी सेना का दामन थाम लिया।इसी दौरान उन्होंने दावा किया था कि प्रदेश के 220 पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उनके साथ नए संगठन में शामिल हुए हैं। हालांकि अब राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।




