सीजी भास्कर, 13 जुलाई। पढ़ाई पूरी करने के बाद जहां अधिकतर युवा नौकरी की तलाश में जुट (Organic Farming) जाते हैं, वहीं कांकेर जिले के एक युवक ने अलग राह चुनी। अर्थशास्त्र में एमए करने के बावजूद उन्होंने खेती को अपना पेशा बनाया और आज प्राकृतिक खेती के दम पर लाखों रुपये की सालाना आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन चुकी है।
कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र के चिचगांव निवासी सोनूराम ध्रुव पिछले कई वर्षों से जैविक खेती कर रहे हैं। उनकी खेती देखने और प्राकृतिक कृषि की जानकारी लेने के लिए प्रदेश ही नहीं, दूसरे राज्यों से भी किसान पहुंच रहे हैं।

10 एकड़ में तैयार की सफल खेती का मॉडल Organic Farming
सोनूराम ने वर्ष 2015 में रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती की शुरुआत की। शुरुआती समय में बिना रासायनिक खाद और दवाइयों के खेती करने पर लोगों ने सवाल भी उठाए, लेकिन उन्होंने अपना प्रयोग जारी रखा। आज वे 10 एकड़ जमीन पर खेती कर हर साल 8 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने टपक सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीक अपनाकर कम पानी में बेहतर उत्पादन हासिल किया और प्राकृतिक तरीकों से खेती को मजबूत बनाया।
मिट्टी को फिर बनाया उपजाऊ
खेती शुरू करने के बाद उन्होंने मिट्टी की जांच कराई, जिसमें जैविक कार्बन की कमी सामने आई। इसके बाद खेत में तिल की फसल उगाकर उसके अवशेष मिट्टी में मिलाए। इस प्रक्रिया से मिट्टी की उर्वरता बढ़ी, जैविक कार्बन में सुधार हुआ और भूमि का पीएच स्तर भी संतुलित हो गया।
घर पर तैयार करते हैं जैविक खाद Organic Farming
सोनूराम बाजार से रासायनिक खाद और कीटनाशक खरीदने के बजाय नींबू, पपीता, हर्रा और अन्य स्थानीय वनस्पतियों से जैविक खाद एवं प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करते हैं। इससे खेती की लागत कम हुई और फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार आया।
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चिन्नौर चावल की देशभर में मांग
वर्तमान में वे चार एकड़ में जैविक चिन्नौर धान की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा ब्लैक राइस, गेहूं, उड़द, कुल्थी, रागी, काली हल्दी, आम और प्रयोग के तौर पर काली मिर्च की खेती भी कर रहे हैं।
उनके खेत में तैयार होने वाला चिन्नौर चावल बाजार में करीब 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है। इसके साथ ही उन्होंने गौपालन को भी खेती का हिस्सा बनाया है, जिससे मिलने वाले गोबर और गोमूत्र का उपयोग जैविक खेती में किया जाता है।
किसानों को दिया प्राकृतिक खेती अपनाने का संदेश Organic Farming
सोनूराम का कहना है कि रासायनिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार घट रही है और लागत बढ़ती (Organic Farming) जा रही है। उनका मानना है कि स्थानीय संसाधनों से तैयार जैविक खाद और बहुफसली खेती अपनाकर किसान कम खर्च में बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती भी अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनती है।


