सीजी भास्कर, 28 जून। दंतेवाड़ा जिले के छोटे से गांव हीरानार से निकलकर पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती (Padma Shri Dr Budhri Tati) ने संघर्ष, सेवा और समर्पण की ऐसी मिसाल कायम की है, जो आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी है। महज 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़कर समाज सेवा का मार्ग चुना और बस्तर के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता का अभियान शुरू किया। वर्षों की तपस्या और समाज के लिए किए गए कार्यों के चलते उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया।
15 साल की उम्र में लिया समाज सेवा का संकल्प
पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती (Padma Shri Dr Budhri Tati) ने बताया कि उस समय आदिवासी समाज में महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी आसान नहीं था। वनवासी कल्याण आश्रम से प्रेरित होकर उन्होंने समाज के लिए काम करने का संकल्प लिया और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने उद्देश्य से कभी पीछे नहीं हटीं।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में न सड़कें थीं और न ही परिवहन की कोई सुविधा। कई किलोमीटर पैदल चलकर गांवों तक पहुंचना पड़ता था। कई बार भूखे पेट रात गुजारनी पड़ी, लोगों का अविश्वास झेलना पड़ा और जान से मारने की धमकियां भी मिलीं, लेकिन समाज सेवा के संकल्प ने उन्हें हर कठिनाई से लड़ने की ताकत दी।
555 गांवों तक पहुंचाया शिक्षा और आत्मनिर्भरता का संदेश
पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती (Padma Shri Dr Budhri Tati) ने बस्तर के 555 गांवों का दौरा कर महिलाओं और बच्चों के बीच शिक्षा की अलख जगाई। उन्होंने पहले स्वयं दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की और इसके बाद हजारों महिलाओं को साक्षर बनाने का अभियान चलाया। साथ ही महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया।
उनके प्रयासों से अनेक महिलाएं आज स्वावलंबी बन चुकी हैं और हजारों बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिला है।
संघर्ष के बीच कभी नहीं डगमगाया हौसला
डॉ. बुधरी ताती का कहना है कि जीवन में अनेक कठिनाइयां आईं, लेकिन कभी समाज सेवा छोड़ने का विचार नहीं आया। उनका मानना है कि यदि लक्ष्य बड़ा हो तो चुनौतियां छोटी लगने लगती हैं। आज जब उनके प्रयासों से पढ़े-लिखे बच्चे और आत्मनिर्भर महिलाएं बेहतर जीवन जी रही हैं, तो उन्हें अपने संघर्ष का वास्तविक फल दिखाई देता है।
सम्मान समारोह में किया गया अभिनंदन
वनवासी विकास समिति द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में पद्मश्री सम्मानित डॉ. बुधरी ताती, डॉ. राम गोडबोले और सुनीता गोडबोले का अभिनंदन किया गया। तीनों को जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में लंबे समय से किए जा रहे उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।



