सीजी भास्कर, 27 अप्रैल : छत्तीसगढ़ की राजधानी में सियासी पारा उस वक्त सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब नगर निगम (Raipur Municipal Corporation Meeting) की विशेष सामान्य सभा शुरू होने से पहले ही हंगामे की भेंट चढ़ गई। शहर की ज्वलंत समस्याओं और राजनीतिक मतभेदों के बीच भाजपा के पार्षद और स्वयं महापौर काले कपड़े पहनकर सदन में पहुंचे। काले लिबास में पहुंचे इन जनप्रतिनिधियों ने कांग्रेस सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए “कांग्रेस शर्म करो” के जमकर नारे लगाए। माहौल इतना गरमा गया कि महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर बुलाई गई इस बैठक में विपक्ष ने सत्तापक्ष पर महिला विरोधी होने का गंभीर आरोप जड़ दिया और सदन की कार्यवाही शुरू होते ही तीखी नोकझोंक का सिलसिला शुरू हो गया।
जल संकट पर चर्चा से इनकार, भड़का विपक्ष
विशेष सामान्य सभा (Raipur Municipal Corporation Meeting) में हंगामे की मुख्य वजह शहर में गहराता जल संकट बना। भीषण गर्मी के बीच रायपुर के कई वार्डों में पानी की किल्लत को लेकर विपक्ष ने चर्चा की पुरजोर मांग उठाई। हालांकि, सभापति ने यह कहते हुए चर्चा से इनकार कर दिया कि इस विषय पर दोनों पक्षों के बीच पहले सहमति नहीं बन पाई है। जैसे ही चर्चा का प्रस्ताव खारिज हुआ, विपक्षी पार्षद आक्रोशित होकर वेल तक पहुंच गए। जहां एक तरफ सत्तापक्ष महिला सशक्तिकरण अभियान पर ध्यान केंद्रित करना चाहता था, वहीं विपक्ष ने जल संकट को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताते हुए सदन की मेजें थपथपाना शुरू कर दिया ।
भारी सुरक्षा बल तैनात, नारों से गूंजा परिसर
संभावित हंगामे और पार्षदों (Raipur Municipal Corporation Meeting) के आक्रामक रुख को देखते हुए नगर निगम परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। बैठक शुरू होने से पहले ही भाजपा पार्षदों ने गेट पर प्रदर्शन किया और कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विपक्ष का तर्क था कि जब शहर प्यासा है, तब प्रशासन केवल सांकेतिक अभियानों में व्यस्त है। काले कपड़ों में पहुंचे पार्षदों के इस विरोध प्रदर्शन ने सदन की गरिमा और राजनीतिक रस्साकशी को सार्वजनिक कर दिया, जिससे बैठक की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही ।
पिछली बैठकों का विवाद और लंबित एजेंडे
उल्लेखनीय है कि नगर निगम की पिछली सामान्य सभा (Raipur Municipal Corporation Meeting) भी काफी विवादों में रही थी। 9 अप्रैल को हुई बैठक में सिटी कोतवाली चौक का नाम ‘जैन स्तंभ’ रखने जैसे 14 एजेंडों पर बहस हुई थी, जिसमें विपक्ष के भारी विरोध के कारण कई प्रस्ताव निरस्त करने पड़े थे। इस बार भी किरण बिल्डिंग परिसर की दुकानों के व्यवस्थापन और शहर के विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी थी, लेकिन राजनीतिक शोरगुल के बीच विकास के मुद्दे कहीं पीछे छूटते नजर आए। फिलहाल, हंगामे और आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच सभा की कार्यवाही जारी है और देखना होगा कि शहर के बुनियादी मुद्दों पर कोई ठोस नतीजा निकल पाता है या यह बैठक भी केवल विरोध प्रदर्शन तक ही सीमित होकर रह जाती है ।


