“रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को “सबसे लचर, दिशाहीन, कमजोर और औचित्यहीन” बताते हुए उसका पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में इससे कमजोर अविश्वास प्रस्ताव कभी नहीं आया।
“विपक्ष के बीच ही नहीं है तालमेल”
रामविचार नेताम ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर ही सामंजस्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में नेतृत्व को लेकर खींचतान मची हुई है और बस्तर से लेकर सरगुजा तक अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। शायराना अंदाज में उन्होंने कहा, “दोस्ती तुम्हारे बस की नहीं, कम से कम दुश्मनी तो निभा लेते… सौ झूठ बोले तुमने, एक सच तो बता देते।”
“सिर्फ हेडलाइन बनाना चाहता है विपक्ष”
मंत्री नेताम ने आरोप लगाया कि विपक्ष का मकसद केवल मीडिया की सुर्खियां बटोरना है। उन्होंने कहा कि चाहे कुर्ता फाड़कर या फिर हिड़मा को हीरो बताकर, विपक्ष सिर्फ चर्चा में बने रहना चाहता है। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज का बेटा मुख्यमंत्री बना है, आदिवासी और अनुसूचित जाति समाज के नेताओं को मंत्री बनाया गया है, लेकिन विपक्ष को यह रास नहीं आ रहा।
जातीय टिप्पणी पर सदन में हंगामा
मंत्री के बयान के दौरान विपक्ष ने उन पर जाति के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव किसी व्यक्ति, मंत्री या जाति के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज के खिलाफ लाया गया है। उन्होंने मंत्री से भ्रामक बयान न देने की मांग की। इस मुद्दे पर सदन में कुछ देर तक तीखी नोकझोंक भी हुई।
अविश्वास प्रस्ताव पर जारी है चर्चा
विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी बहस जारी है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ सरकार के कामकाज और विपक्ष की भूमिका को लेकर एक-दूसरे पर हमलावर हैं। सदन में चर्चा के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।



