सीजी भास्कर, 15 अप्रैल : राज्य सरकार ने प्रदेश की महिलाओं (Registry Charges) को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया है कि अब महिलाओं के नाम पर होने वाली अचल संपत्ति या भूमि की रजिस्ट्री पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क में 50 प्रतिशत की भारी कटौती की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल महिलाओं के नाम पर संपत्ति के स्वामित्व में वृद्धि होगी, बल्कि समाज में उनकी आर्थिक भागीदारी को भी नया आयाम मिलेगा। इस निर्णय को राज्य में (Women Empowerment) की दिशा में एक बड़ा निवेश माना जा रहा है।
राजस्व पर प्रभाव और दूरगामी लक्ष्य
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, रजिस्ट्री शुल्क में इस रियायत के कारण राज्य के सरकारी खजाने पर लगभग 153 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इसे राजस्व की हानि के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और (Registry Charges) को बढ़ावा देने वाले एक निवेश के रूप में देख रही है।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य परिवारों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करना है कि वे अचल संपत्तियों को घर की महिलाओं के नाम पर दर्ज करवाएं, जिससे भविष्य में उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सैनिकों और युद्ध विधवाओं के लिए विशेष प्रावधान
महिलाओं के साथ-साथ, सरकार ने देश की रक्षा में तैनात सैनिकों और युद्ध विधवाओं के प्रति भी सम्मान प्रकट करते हुए उन्हें बड़ी राहत दी है। नए नियमों के मुताबिक, सैनिक और युद्ध विधवाएं यदि 25 लाख रुपये तक की कीमत की कोई भी संपत्ति खरीदते हैं, तो उन्हें स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की विशेष छूट (Registry Charges) प्रदान की जाएगी।
यह रियायत उन परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी जिन्होंने राष्ट्र सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। सरकार के इन दोहरे फैसलों की हर तरफ सराहना हो रही है, क्योंकि यह विकास के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्वों को भी बखूबी संतुलित करता है।


