सीजी भास्कर, 20 मई। जांजगीर चांपा जिले में हसदेव नदी की प्रस्तावित रेत खदान को लेकर चल (Sand Mining) रही चर्चा के बीच हाईकोर्ट के फैसले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। ग्राम पंचायत हथनेवरा की ओर से उठाए गए सवालों के बाद मामला अदालत तक पहुंचा था। फैसले के बाद अब रेत खनन प्रक्रिया और सर्वे रिपोर्ट को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
स्थानीय लोगों के बीच भी इस मामले को लेकर लगातार चर्चा चल रही थी। पंचायत पक्ष का कहना था कि पुराने दस्तावेजों के आधार पर पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। वहीं अदालत के फैसले के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।
ग्राम पंचायत ने दी थी चुनौती : Sand Mining
मामला जांजगीर चांपा जिले के हथनेवरा ग्राम पंचायत से जुड़ा है जहां प्रशासन ने रेत खनन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। आरोप लगाया गया कि यह प्रक्रिया पांच साल पुरानी जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई जिसकी वैधता खत्म हो चुकी थी। इसके बावजूद 30 मार्च को रेत नीलामी का टेंडर जारी किया गया और सफल बोलीदाता का चयन भी कर लिया गया था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
ग्राम पंचायत हथनेवरा के सरपंच ने इस पूरी प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती (Sand Mining) दी। याचिका में कहा गया कि जिले में नई और वैध जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट मौजूद नहीं है इसलिए टेंडर प्रक्रिया नियमों के खिलाफ है। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल ड्राफ्ट रिपोर्ट वेबसाइट पर डाल देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
अंतिम मंजूरी जरूरी
अदालत ने कहा कि रिपोर्ट पर जनता से आपत्तियां मंगाना और उसके बाद कलेक्टर की मंजूरी लेना जरूरी प्रक्रिया है। तभी किसी रिपोर्ट को अंतिम जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट माना जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि बिना अंतिम स्वीकृति वाली रिपोर्ट के आधार पर रेत खदानों की नीलामी नहीं की जा सकती।
सरकार ने रखी अपनी दलील
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि 2025 की नई रिपोर्ट तैयार कर 27 नवंबर 2025 को ऑनलाइन अपलोड (Sand Mining) की गई थी और टेंडर प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी। सरकार ने तर्क दिया कि रोक लगाने से राजस्व प्रभावित होगा। हालांकि सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि सरकार जिस रिपोर्ट का हवाला दे रही थी वह केवल ड्राफ्ट रिपोर्ट थी और उसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली थी।
दोबारा जारी हो सकता है टेंडर
हाईकोर्ट ने रेत खदान का टेंडर रद्द करते हुए राज्य सरकार को नियमों के अनुसार नई और स्वीकृत जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करने की छूट दी है। इसके बाद दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।



