सीजी भास्कर, 02 मई : बालोद जिले के डौंडी थाना क्षेत्र के बंधिया पारा से एक बेहद दुखद और झकझोर (Student Suicide Case) देने वाली घटना सामने आई है, जहां 10वीं कक्षा में लगातार असफलता से परेशान एक नाबालिग युवक ने आत्मघाती कदम उठा लिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। मृतक की पहचान 17 वर्षीय राजवीर बघेल के रूप में हुई है, जिसने कम उम्र में ही जीवन से हार मान ली।
जानकारी के अनुसार, राजवीर बघेल पिछले दो वर्षों से 10वीं की परीक्षा में सफलता हासिल नहीं कर पा रहा था। पहले वर्ष (Student Suicide Case) वह छह विषयों में असफल रहा था, जबकि इस बार भी पांच विषयों में फेल हो गया। लगातार मिल रही असफलता ने उसके आत्मविश्वास को बुरी तरह प्रभावित किया और वह मानसिक रूप से टूटता चला गया। बताया जा रहा है कि इसी तनाव और दबाव के कारण उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
परिवार के लोगों के मुताबिक, राजवीर पिछले कुछ समय से काफी चुपचाप (Student Suicide Case) रहने लगा था और किसी से ज्यादा बातचीत भी नहीं करता था। उसकी दिनचर्या में भी बदलाव देखने को मिल रहा था, लेकिन परिजन उसकी मानसिक स्थिति को पूरी तरह समझ नहीं पाए। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि बच्चों और किशोरों की भावनाओं को समझना कितना जरूरी है।
घटना का पता उस समय चला जब परिजनों ने उसे घर के अंदर फंदे (Student Suicide Case) पर लटका हुआ देखा। यह दृश्य देखकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही डौंडी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।
पुलिस ने शव (Student Suicide Case) को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।
इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा के दबाव, प्रतिस्पर्धा और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि असफलता जीवन का अंत नहीं होती, बल्कि यह सीखने और आगे बढ़ने का एक अवसर होती है। ऐसे समय में परिवार और समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, किशोर अवस्था में भावनात्मक संतुलन बनाए रखना कठिन होता है, ऐसे में छोटी-छोटी असफलताएं भी बड़े झटके के रूप में सामने आ सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों के साथ संवाद बनाए रखा जाए और उन्हें यह भरोसा दिलाया जाए कि वे अकेले नहीं हैं।
प्रशासन और शिक्षा विभाग (Student Suicide Case) को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि छात्रों को काउंसलिंग और मानसिक सहयोग मिल सके। यह घटना समाज को एक गहरी सीख देती है कि बच्चों पर अत्यधिक दबाव डालने के बजाय उन्हें समझने और संभालने की जरूरत है।


