सीजी भास्कर, 17 मई। दिल्ली में रविवार को न्यायिक गलियारों में अचानक हलचल (Supreme Court) बढ़ गई। वकीलों और कानून से जुड़े लोगों के बीच पूरे दिन एक ही फैसले की चर्चा होती रही। सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से बढ़ते मामलों और सुनवाई में लग रहे समय को लेकर जो चिंता बनी हुई थी, अब उस पर बड़ा कदम उठाया गया है। कई अधिवक्ताओं ने इसे अदालत व्यवस्था के लिए अहम फैसला बताया है।
सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भी इस फैसले को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालतों में लंबित मामलों का दबाव लगातार बढ़ रहा था और ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना जरूरी हो गया था। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इससे मामलों के निपटारे की रफ्तार तेज हो सकती है।
राष्ट्रपति ने दी मंजूरी : Supreme Court
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के फैसले को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई है। नए संशोधन अध्यादेश के जरिए सर्वोच्च न्यायालय अधिनियम 1956 में बदलाव किया गया है।
चार नए न्यायाधीशों की होगी नियुक्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद अब अदालत में चार नए न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर पहले जहां 33 जजों की व्यवस्था थी, अब यह संख्या बढ़ाकर 37 कर दी गई है।
लंबित मामलों के दबाव को कम करने की तैयारी
कानूनी क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने इस फैसले का स्वागत (Supreme Court) किया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में हर साल मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा था। माना जा रहा है कि जजों की संख्या बढ़ने से सुनवाई और फैसलों की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है।
नए भवन और ढांचे पर भी जोर
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि अदालत में लंबे समय से अधिक न्यायाधीशों की जरूरत महसूस की जा रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि बेहतर बुनियादी ढांचे की भी जरूरत है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि नए सुप्रीम कोर्ट भवन का एक हिस्सा इसी साल के अंत तक शुरू (Supreme Court) हो सकता है। उनके मुताबिक वर्तमान व्यवस्था में 38 न्यायाधीश आसानी से काम कर सकते हैं और आने वाले वर्षों में यह संख्या करीब 50 तक पहुंचने की जरूरत पड़ सकती है।



