सीजी भास्कर, 22 जून। छत्तीसगढ़ से जुड़े तीन अलग अलग आपराधिक मामलों ने अब राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी चर्चा का विषय (Supreme Court) बना लिया है। नशीले पदार्थों और अवैध शराब तस्करी से जुड़े मामलों में हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद आरोपियों ने शीर्ष अदालत का रुख किया है। इसके बाद इन मामलों की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिक गई हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में शीर्ष अदालत की प्रारंभिक प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी बीच राज्य सरकार से जवाब तलब किए जाने के बाद अब आगे की सुनवाई पर विशेष ध्यान रहेगा।
छत्तीसगढ़ के तीन अलग अलग गंभीर आपराधिक मामलों में जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं दायर की हैं। इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न पीठों ने छत्तीसगढ़ शासन को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
गांजा तस्करी का मामला Supreme Court
दुर्ग जिले के कुम्हारी थाना क्षेत्र में 7 सितंबर 2025 को 388 किलोग्राम गांजा जब्त किए जाने के मामले में गिरफ्तार मोहम्मद फैयाज की जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी। अदालत ने मामले में व्यावसायिक मात्रा का हवाला दिया था।
अब इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस अतुल एस. चन्दूरकर की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए 17 अगस्त 2026 तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
अवैध शराब तस्करी से जुड़ा प्रकरण
कबीरधाम जिले के कुकदूर क्षेत्र में फरवरी 2025 के दौरान 351 बल्क लीटर अवैध शराब के साथ पकड़े गए धर्मेंद्र उर्फ सोनू सारिवान की जमानत भी हाई कोर्ट ने अस्वीकार कर दी थी।
अदालत ने उसके खिलाफ दर्ज अन्य आपराधिक मामलों और आदतन अपराधी होने के पहलू को ध्यान में रखा था। इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 17 अगस्त 2026 तक जवाब मांगा है।
प्रतिबंधित इंजेक्शन बरामदगी मामला
सरगुजा जिले के बतौली क्षेत्र में 30 जनवरी 2026 को 600 प्रतिबंधित ब्यूप्रेनार्फिन इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार (Supreme Court) किए गए विनय गुप्ता की जमानत याचिका भी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
मामले में बरामद सामग्री की मात्रा और अपराध की गंभीरता को आधार बनाते हुए राहत देने से इनकार किया गया था। इसके बाद दायर अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस उज्जल भुयान और जस्टिस अरुण पल्ली की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने 11 अगस्त 2026 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अब आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नोटिस के बाद अब राज्य सरकार को संबंधित मामलों में अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद शीर्ष अदालत इन जमानत याचिकाओं पर आगे की सुनवाई (Supreme Court) करेगी। फिलहाल तीनों मामलों में अंतिम निर्णय आना बाकी है।





