सीजी भास्कर, 03 जुलाई। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण को लेकर चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला (Teacher Rationalization) सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की नीति को जनहित में उठाया गया कदम बताते हुए उसके खिलाफ दायर सभी प्रमुख याचिकाओं को खारिज कर दिया। फैसले के बाद प्रदेश में लागू युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को कानूनी मजबूती मिल गई है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों का स्थानांतरण और पदस्थापना प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है। किसी भी कर्मचारी को किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से बने रहने का कानूनी या संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
24 से ज्यादा याचिकाएं हुईं खारिज Teacher Rationalization
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ सहित प्रदेशभर से दायर 24 से अधिक याचिकाओं को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा अपनाई गई नीति जनहित में है।
युक्तियुक्तकरण नीति को दी गई थी चुनौती
राज्य सरकार ने 2 अगस्त 2024 को शिक्षकों और स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के लिए दिशा निर्देश जारी किए थे। इसके बाद अप्रैल 2025 में इसके क्रियान्वयन के आदेश जारी हुए। नीति के तहत अतिशेष शिक्षकों को शिक्षकविहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों में पदस्थ करने का प्रावधान किया गया।
इस नीति के खिलाफ दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, कांकेर, कोंडागांव, महासमुंद और अन्य जिलों के शिक्षकों तथा शिक्षक संगठनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
शिक्षकों ने उठाए थे ये सवाल
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह नीति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। उनका आरोप था कि अतिशेष शिक्षकों की पहचान में वरिष्ठता की अनदेखी की गई और अंतिम नियुक्ति पहले स्थानांतरण के सिद्धांत को गलत तरीके से लागू किया गया। इसके अलावा यह भी दलील दी गई कि आदेश संविधान के अनुच्छेद 166 के तहत राज्यपाल के नाम से विधिवत जारी नहीं किया गया।
सरकार ने कोर्ट में रखा पक्ष
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि युक्तियुक्तकरण का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद से मंजूर होने के बाद राज्यपाल के नाम से विधिवत आदेश जारी किया (Teacher Rationalization) गया था। सरकार ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने वाला कोई ठोस आंकड़ा प्रस्तुत नहीं कर सके कि किसी स्कूल में छात्र शिक्षक अनुपात प्रभावित हुआ है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने कहा कि सरकार का आदेश पूरी तरह वैध है और इसे विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी किया गया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक कोई सरकारी नीति मनमानी, दुर्भावनापूर्ण या स्पष्ट रूप से अवैध साबित न हो, तब तक न्यायालय उसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।
16 हजार से ज्यादा शिक्षकों का हुआ युक्तियुक्तकरण
राज्य सरकार के अनुसार प्रदेश में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत 16,165 शिक्षकों और प्राचार्यों का स्थानांतरण किया गया है। इसके अंतर्गत 10,463 स्कूलों में व्यवस्था का पुनर्गठन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे विद्यालयों की है जहां पहले शिक्षक नहीं थे या केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना राज्य का संवैधानिक दायित्व (Teacher Rationalization) है और इस उद्देश्य से उठाए गए उचित प्रशासनिक कदमों में अनावश्यक न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।



