सीजी भास्कर, 03 जुलाई। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत का इंतजार कर रहे लोगों के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अहम जानकारी (Petrol-Diesel Price) दी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईंधन की कीमतों में तत्काल कमी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि मौजूदा बिक्री पहले से महंगे दाम पर खरीदे गए कच्चे तेल पर आधारित है।
मंत्री के अनुसार आने वाले समय में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं तो आगे कीमतों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी इस बारे में कोई निश्चित समय बताना संभव नहीं है।
अभी क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल और डीजल के दाम Petrol-Diesel Price
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि वर्तमान में बाजार में बिक रहा पेट्रोल और डीजल उस कच्चे तेल से तैयार किया गया है, जिसे कुछ महीने पहले तब खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और माल ढुलाई की लागत अधिक थी। इसी कारण तेल विपणन कंपनियों पर लागत का दबाव बना हुआ है और फिलहाल कीमतों में तत्काल कटौती संभव नहीं दिख रही है।
कीमतों में राहत कब मिल सकती है
मंत्री ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कीमतों में कमी कब होगी, इस बारे में अभी कोई अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
सरकार ने उत्पाद शुल्क घटाने का भी किया जिक्र
मंत्री ने बताया कि पहले कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के दौरान उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर तक उत्पाद शुल्क में कटौती (Petrol-Diesel Price) की थी। उनके अनुसार इस फैसले से सरकार को करीब एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा।
रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने की तैयारी
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अगले छह महीने से दो वर्षों के भीतर देश की तेल रिफाइनिंग क्षमता 270 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़कर करीब 300 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो जाएगी। उन्होंने कहा कि नई रिफाइनरी परियोजनाओं के शुरू होने से भारत वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रिफाइनिंग केंद्र के रूप में और मजबूत होगा।
ईंधन भंडार को लेकर भी दी जानकारी
मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट के दौरान भी भारत के पास पर्याप्त कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी का भंडार उपलब्ध (Petrol-Diesel Price) था। आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति के कारण देश में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित नहीं हुई।



