सीजी भास्कर, 8 अगस्त : भारत और चीन समेत पांच देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का बिल अमेरिकी सीनेट (US Senate) में पास हो गया है। बिल के पक्ष में 86 सांसदों ने वोट किया, जबकि 11 सांसदों ने इसका विरोध किया। इस प्रस्ताव में भारत पर भी 100 फीसदी टैरिफ (Trump Tariff) लगाने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, यह अभी कानून नहीं बना है। इसे आगे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से भी मंजूरी मिलना जरूरी है।
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भारत समेत 5 देशों पर लग सकता है 100% टैरिफ
बिल के मुताबिक अमेरिका भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया से जुड़े आयात पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है। इस बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के सांसदों का समर्थन मिला है। इसका मुख्य उद्देश्य रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है, ताकि रूस की तेल से होने वाली कमाई कम की जा सके। इस प्रस्ताव के पीछे रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करने की रणनीति बताई जा रही है। अमेरिका का मानना है कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया जा सकता है।
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पहले 500% टैरिफ लगाने का था प्रस्ताव
इस बिल के शुरुआती ड्राफ्ट में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ (Trump Tariff) लगाने का प्रस्ताव था। हालांकि, बाद में इसे घटाकर 100 फीसदी कर दिया गया। अब सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद बिल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा।
अगर प्रतिनिधि सभा से भी बिल पास हो जाता है, तो इसे अंतिम मंजूरी के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही यह कानून का रूप ले सकेगा। फिलहाल भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव प्रक्रिया में है।
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रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदता है भारत
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल (Russian Crude Oil) खरीदता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून में भारत ने रूस से रिकॉर्ड करीब 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा था। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 53 फीसदी बताया गया है।
मई की तुलना में जून में भारत ने रूस से करीब 39 फीसदी अधिक कच्चा तेल आयात किया। ऐसे में अगर अमेरिका की ओर से 100 फीसदी टैरिफ (Trump Tariff) लागू किया जाता है, तो भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ भारतीय कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।
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बिल पास, अब आगे क्या होगा
अमेरिकी सीनेट से बिल पास होने के बाद अब अगली नजर प्रतिनिधि सभा पर है। वहां मंजूरी मिलने के बाद ही इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। यदि राष्ट्रपति भी मंजूरी दे देते हैं, तो भारत समेत संबंधित देशों पर प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ लागू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
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