सीजी भास्कर, 12 जुलाई। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 में वर्ष 2023 से किए गए महत्वपूर्ण संशोधनों के बाद पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन अब सीधे आर्थिक दंड के दायरे में आ गया है। केंद्र सरकार ने अधिनियम में धारा 15C जोड़ते हुए प्रत्येक राज्य के लिए निर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) नियुक्त करने की व्यवस्था की है। (Environmental Rules Penalty)
छत्तीसगढ़ में आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब वे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों, अधिसूचनाओं एवं निर्देशों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की सुनवाई कर कानून के अनुसार दंड निर्धारित करेंगे।

₹10 हजार से ₹15 लाख तक जुर्माना : Environmental Rules Penalty
रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि संशोधित धारा 15 के तहत पर्यावरण संरक्षण अधिनियम या उसके अधीन जारी नियमों एवं निर्देशों का उल्लंघन करने पर ₹10,000 से लेकर ₹15 लाख तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। यदि उल्लंघन लगातार जारी रहता है तो प्रत्येक दिन अतिरिक्त जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है।
सरकारी विभाग भी नहीं बचेंगे
संशोधित कानून के अनुसार यदि किसी सरकारी विभाग द्वारा पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो संबंधित अधिकारी या विभागाध्यक्ष पर एक माह के वेतन के बराबर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। इससे सरकारी संस्थानों की जवाबदेही भी तय होगी।
जुर्माना नहीं भरा तो जेल : Environmental Rules Penalty
कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित आर्थिक दंड का भुगतान नहीं किया जाता है, तो दोषी को तीन वर्ष तक की कैद, या दोगुना आर्थिक दंड, अथवा दोनों सजा दी जा सकती है
यह भी पढ़ें :
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम : https://cgbhaskar.com/wetland-mitra-for-conservation-of-biodiversity/



