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Home » शराब पीकर याचिकाकर्ता के घर गई, खुद मुसीबत को न्योता दिया… रेप पर HC की इस टिप्पणी से सुप्रीम कोर्ट नाराज, SG मेहता ने भी की बहस

शराब पीकर याचिकाकर्ता के घर गई, खुद मुसीबत को न्योता दिया… रेप पर HC की इस टिप्पणी से सुप्रीम कोर्ट नाराज, SG मेहता ने भी की बहस

By Newsdesk Admin
15/04/2025
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इलाहाबाद , 15 अप्रैल, 2025 :

सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक टिप्पणी पर मंगलवार (15 अप्रैल, 2025) को आपत्ति जताई. हाईकोर्ट ने कहा था कि शिकायतकर्ता ने खुद ही मुसीबत को आमंत्रित किया. सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि जमानत याचिका पर फैसला करते समय हाईकोर्ट ने ऐसी टिप्पणी क्यों की.

हाईकोर्ट ने हाल में बलात्कार के मामले में जमानत देते हुए कहा था कि शिकायतकर्ता ने शराब पीकर याचिकाकर्ता के घर जाने के लिए सहमति जताकर खुद ही मुसीबत को आमंत्रित किया. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 17 मार्च के एक आदेश पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. हाईकोर्ट ने आदेश में कहा था कि स्तनों को पकड़ना और महिला के पायजामे या सलवार का नाड़ा खींचना बलात्कार के अपराध के दायरे में नहीं आता.

जस्टिस भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, ‘उसी हाईकोर्ट के एक अन्य न्यायाधीश ने एक और आदेश पारित किया है.’ जस्टिस गवई ने कहा, ‘अगर कोई जमानत देना चाहता है तो ठीक है, लेकिन ऐसी टिप्पणियां क्यों की गईं कि उसने मुसीबत को खुद ही आमंत्रित किया और इस तरह की बातें. इस तरफ भी (पीठ को) बहुत सावधान रहना होगा.’

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आम आदमी ऐसी टिप्पणियों को कैसे लेता है, इसे ध्यान में रखना आवश्यक है. पीठ ने स्वत: संज्ञान मामले में सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च को बलात्कार के प्रयास के मामले में हाईकोर्ट के 17 मार्च के आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसका अर्थ था कि वर्तमान आरोपियों या अन्य द्वारा राहत पाने के लिए किसी भी न्यायिक कार्यवाही में इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उच्च न्यायालय की कुछ टिप्पणियां पूर्णतः असंवेदनशील और अमानवीय दृष्टिकोण वाली थीं. मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के संज्ञान में मामला लाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया था. हाईकोर्ट ने 17 मार्च को अपने एक आदेश में कहा था कि महज स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना बलात्कार के अपराध के दायरे में नहीं आता लेकिन इस तरह के अपराध किसी भी महिला के खिलाफ हमले या आपराधिक बल के इस्तेमाल के दायरे में आते हैं.

उच्च न्यायालय का आदेश आरोपियों द्वारा दायर एक याचिका पर आया था. इन आरोपियों ने कासगंज के विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की थी, जिसके जरिए उन्हें अन्य धाराओं के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) के तहत कथित अपराध के लिए समन जारी किया गया था.

एक अन्य मामले में, हाईकोर्ट ने एक आरोपी को जमानत देते हुए आदेश पारित किया और कहा, ‘पक्षों के वकीलों को सुनने और मामले पर समग्रता से गौर करने के बाद, मैं पाता हूं कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि पीड़िता और याचिकाकर्ता दोनों ही बालिग हैं. पीड़िता एमए की छात्रा है, इसलिए वह अपने कृत्य की नैतिकता और महत्व को समझने में सक्षम थी, जैसा कि उसने प्राथमिकी में बताया है.’

हाईकोर्ट ने कहा, ‘अदालत का मानना ​​है कि यदि पीड़िता के आरोप को सच मान भी लिया जाए तो भी यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि उसने खुद ही मुसीबत को आमंत्रित किया और वह इसके लिए स्वयं ही जिम्मेदार है.’

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