सीजी भास्कर, 03 जून : पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद से ममता बनर्जी की सियासी मुश्किलें (West Bengal Political Crisis) थमने का नाम नहीं ले रही हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस वक्त अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रही है और पार्टी सीधे तौर पर दो फाड़ होने की कगार पर खड़ी हो गई है। टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। राजनीतिक गलियारों और सूत्रों से आ रही खबरों के मुताबिक, इस बागी गुट को टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 59 से अधिक विधायकों का मजबूत समर्थन हासिल हो चुका है।
इस सियासी ड्रामे (West Bengal Political Crisis) की शुरुआत सोमवार रात को हुई, जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में टीएमसी के कई विधायकों के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की। इससे पहले ही ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक से टीएमसी के 80 में से 60 विधायकों ने दूरी बना ली थी। अब उन्हीं नाराज विधायकों के साथ बागी नेताओं की इस मुलाकात ने बंगाल के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
अभिषेक बनर्जी और आई-पैक को लेकर फूटा गुस्सा
पार्टी के भीतर से आ रही आवाजें बताती हैं कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर बड़े नेताओं तक का अब ममता बनर्जी से मोहभंग हो रहा है। विशेष रूप से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर विरोध के सुर सबसे ज्यादा तेज हैं। टीएमसी के कई बागी विधायक और वरिष्ठ नेता खुले तौर पर इस दुर्दशा के लिए अभिषेक बनर्जी के कामकाज के तरीके को ही दोषी ठहरा रहे हैं। नेताओं का आरोप है कि पार्टी में भ्रष्टाचार, घमंड और परिवारवाद चरम पर पहुंच चुका है। इसके साथ ही सीनियर नेताओं को लगातार दरकिनार किया जा रहा है और ‘आई-पैक’ (I-PAC) के प्रोफेशनल्स के जरिए पूरी पार्टी को एक निजी जागीर की तरह चलाया जा रहा है, जिससे विधायकों का स्वाभिमान आहत हुआ है।
इस बगावत का असर मंगलवार को तब साफ देखने को मिला जब ममता बनर्जी ने एक राजनीतिक धरने का आयोजन किया। इस धरने से टीएमसी के अधिकांश विधायकों और सांसदों ने दूरी बनाए रखी। पूरे प्रदर्शन में ममता के साथ केवल 8 विधायक और 6 सांसद ही शामिल हुए, जो पार्टी पर ढीली होती उनकी पकड़ का साफ संकेत है।
क्या है बागी विधायकों की मुख्य मांग
टीएमसी के इन 59 बागी विधायकों ने ममता बनर्जी को सीधा झटका देते हुए एक कड़ा रुख अपनाया है। बागी गुट में शामिल विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि 59 विधायकों ने एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा, “हम सभी ममता बनर्जी के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारी मांग है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय के बजाय पार्टी के ही किसी बेहद वरिष्ठ और अनुभवी नेता को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए। बागी गुट की ओर से अब निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को नए नेता प्रतिपक्ष के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा रहा है।
नंबर गेम में पिछड़ीं ममता, बचे सिर्फ 21 विधायक
विधायकों के इस नए नंबर गेम ने ममता बनर्जी (West Bengal Political Crisis) के खेमे में हड़कंप मचा दिया है। आधिकारिक आंकड़ों और सूत्रों की मानें तो 59 विधायकों के बगावती तेवर अपनाने के बाद अब आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी के वफादार गुट के पास केवल 21 विधायक ही बचे हैं। सत्ता से बाहर होते ही इस तरह की खींचतान ने टीएमसी के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया है।
इस बीच, बंगाल के सियासी हलकों से बड़ी खबर है कि टीएमसी के करीब 20 बागी विधायक विधानसभा परिसर पहुंच चुके हैं। खुद बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बोस भी विशेष रूप से सदन में मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि बागी विधायक जल्द ही स्पीकर रथींद्र बोस से मुलाकात करेंगे, जहां वे आधिकारिक तौर पर 59 विधायकों के हस्ताक्षर का पत्र सौंपकर ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने और उन्हें अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग रखेंगे।




