सीजी भास्कर, 21 अप्रैल : वन क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण (Mahasamund Forest Case) के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत महासमुंद जिले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। वनमंत्री केदार कश्यप की मंशानुसार वनमंडल महासमुंद द्वारा 20 अप्रैल को बागबहरा परिक्षेत्र के आमाकोनी सर्किल, तमोरा बीट के कक्ष क्रमांक 95 एवं 96 में स्थित आरक्षित वन भूमि पर सख्त कार्रवाई करते हुए लगभग 94 हेक्टेयर क्षेत्र से अवैध अतिक्रमण हटाया गया।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि ग्राम तमोरा (Mahasamund Forest Case) के कुछ लोगों ने बड़े पैमाने पर वन भूमि पर कब्जा करने के उद्देश्य से हरे-भरे और मूल्यवान वृक्षों की अवैध कटाई की थी। इसके साथ ही कृषि कार्य के लिए जमीन को जोतकर और खुदाई कर अनधिकृत रूप से उपयोग में लाया जा रहा था। इतना ही नहीं, वन सीमा निर्धारण के लिए लगाए गए सीमेंट-कांक्रीट के मुनारों को भी तोड़कर क्षतिग्रस्त किया गया, जिससे सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया। इन गतिविधियों के चलते वन क्षेत्र की बहुमूल्य वन संपदा और औषधीय जड़ी-बूटियों को भारी क्षति पहुंची है।
इस मामले में वन विभाग (Mahasamund Forest Case) ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26(1)(च), 26(1)(ज) तथा लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3(1) के तहत अपराध दर्ज किया। कार्रवाई के दौरान कुल 52 आरोपियों, जिनमें 12 महिलाएं और 40 पुरुष शामिल हैं, को गिरफ्तार कर जिला न्यायालय महासमुंद में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
वन विभाग (Mahasamund Forest Case) के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध गतिविधि किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य वन संरक्षक और वनमंडलाधिकारी ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और भविष्य में भी ऐसे अभियानों को और तेज किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी आदतन अपराधी (Mahasamund Forest Case) बताए जा रहे हैं, जिनके खिलाफ पहले भी कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन उनके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया। ये आरोपी मूलतः ओडिशा के निवासी हैं और पिछले कुछ वर्षों से ग्राम तमोरा में रहकर लगातार वन भूमि पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा भी इनके खिलाफ कई बार विरोध जताया गया था, लेकिन इनके आक्रामक और आपराधिक व्यवहार के कारण क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ था।
बताया गया है कि आरोपियों (Mahasamund Forest Case) ने कई बार वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और धमकी जैसी घटनाएं भी की थीं, जिससे विभागीय कार्यवाही में बाधा उत्पन्न हो रही थी। इसके बाद वन विभाग ने सुनियोजित रणनीति बनाकर व्यापक अभियान चलाया और पुलिस व प्रशासन के सहयोग से इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
इस पूरे अभियान की रूपरेखा उप वनमंडलाधिकारी गोविंद सिंह, परिक्षेत्र अधिकारी लोकनाथ ध्रुव और रेंजर नवीन वर्मा द्वारा पहले से तैयार की गई थी। उनके नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण को पूरी तरह हटाया। इस दौरान परिक्षेत्र सहायक, डिप्टी रेंजर, वनपाल, वनरक्षक और वन विद्यालय महासमुंद (Mahasamund Forest Case) के प्रशिक्षुओं ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।


