सीजी भास्कर 25 अप्रैल I छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर दो बड़े फैसले लिए हैं। एक ओर फीस बढ़ोतरी पर सीमा तय की गई हैI (Crackdown on private schools)
वहीं दूसरी ओर अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी थोपने की प्रथा पर भी सख्ती दिखाई गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भेजे हैं।
फीस बढ़ोतरी पर कड़ा नियंत्रण : Crackdown on private schools
सरकार ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम 2020 के तहत निजी स्कूल हर साल अधिकतम 8% तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। इससे अधिक बढ़ोतरी के लिए जिला फीस समिति की अनुमति अनिवार्य होगी। प्रत्येक स्कूल में फीस समिति को सक्रिय करना होगा और इसकी निगरानी नोडल प्राचार्य व जिला शिक्षा अधिकारी करेंगे। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
किताब, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी पर रोक
सरकार ने निजी स्कूलों को निजी प्रकाशकों की किताबें थोपने से भी मना किया है। कक्षा 1 से 8 तक एनसीईआरटी/एससीईआरटी की किताबों से पढ़ाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं 9वीं से 12वीं तक किसी एक दुकान से किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। यूनिफॉर्म और स्टेशनरी को लेकर भी किसी विशेष दुकान से खरीद का दबाव नहीं बनाया जा सकेगा।
पालकों को मिलेगी राहत
लंबे समय से अभिभावक महंगी किताबों और तय दुकानों से खरीद के दबाव की शिकायत करते रहे हैं, जिससे शिक्षा का खर्च काफी बढ़ जाता था। सरकार के इन आदेशों से फीस पर नियंत्रण के साथ-साथ अतिरिक्त खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।
सख्ती के संकेत, बढ़ेगा नियंत्रण : Crackdown on private schools
सरकार ने इन निर्देशों में ‘कड़ाई से पालन’ और उल्लंघन पर कार्रवाई जैसे स्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल किया है। इससे साफ है कि अब निजी स्कूलों की फीस और व्यावसायिक गतिविधियां भी निगरानी के दायरे में रहेंगी। यह कदम शिक्षा के निजीकरण और बढ़ती लागत के बीच अभिभावकों को राहत देने और स्कूलों पर नियंत्रण बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।


