सीजी भास्कर, 05 मई : तमिलनाडु की राजनीति में ‘थलपति’ विजय ने वह कर दिखाया है जो कमल हासन और रजनीकांत जैसे दिग्गज नहीं कर सके। अपनी नई पार्टी टीवीके (TVK) के साथ विजय ने द्रविड़ राजनीति के 50 साल पुराने बरगद को हिलाकर रख दिया है। ताजा तमिलनाडु चुनाव परिणाम (Tamil Nadu Election Results 2026) के अनुसार, विजय की पार्टी 108 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन सरकार बनाने के जादुई आंकड़े (118) से वह अब भी 10 सीट पीछे हैं। अब सवाल यह है कि क्या विजय अपने सिद्धांतों से समझौता करेंगे या फिर कोई नया राजनीतिक समीकरण साधकर सबको चौंका देंगे?
AIADMK के साथ ‘पावर शेयरिंग’ का दांव
विजय के सामने सबसे पहला और बड़ा विकल्प एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ हाथ मिलाना है। चुनाव से पहले भी दोनों के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट थी, लेकिन सीटों के बंटवारे पर बात नहीं बनी थी। अब जबकि टीवीके सबसे बड़ी पार्टी है, तो पासा पलट चुका है। एआईएडीएमके की प्रवक्ता अप्सरा रेड्डी ने भी संकेत दिए हैं कि पार्टी गठबंधन के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। इस तमिलनाडु चुनाव परिणाम (Tamil Nadu Election Results 2026) के बाद यदि विजय मुख्यमंत्री पद की अपनी शर्त मनवा लेते हैं, तो एआईएडीएमके के साथ मिलकर सरकार बनाना सबसे आसान रास्ता होगा।
कांग्रेस का ‘बाहरी’ समर्थन और ‘किंग’ की ताजपोशी
कांग्रेस ने विजय को पहले ही दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया है। विजय के पिता ने भी संकेत दिए हैं कि वे कांग्रेस के साथ जाने में परहेज नहीं करेंगे। पिछली बार जिस तरह कांग्रेस ने डीएमके को बाहर से समर्थन दिया था, वैसा ही कुछ विजय के लिए भी हो सकता है। इससे विजय को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखने में मदद मिलेगी। इस तमिलनाडु चुनाव परिणाम (Tamil Nadu Election Results 2026) में कांग्रेस की 5 सीटें विजय के लिए संजीवनी साबित हो सकती हैं, बशर्ते वे डीएमके और एआईएडीएमके दोनों से दूरी बनाकर रखना चाहें।
छोटे दलों को मिलाकर बनाएंगे ‘तीसरा मोर्चा’
अगर विजय द्रविड़ पार्टियों (DMK-AIADMK) के साथ नहीं जाना चाहते, तो उनके पास पीएमके (PMK), वीसीके (VCK) और डीएमडीके (DMDK) जैसे छोटे दलों को एक साथ लाने का विकल्प है। इन क्षेत्रीय दलों के पास 2 से 5 सीटें हैं, जिन्हें जोड़कर विजय बहुमत का आंकड़ा छू सकते हैं। इससे उन्हें सरकार पर पूरा नियंत्रण मिलेगा और वे अपनी ‘क्लीन पॉलिटिक्स’ की छवि को भी बरकरार रख पाएंगे। हालांकि, इन छोटे दलों की अलग-अलग विचारधाराओं को एक मंच पर लाना विजय के लिए किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।
बीजेपी से दूरी या मजबूरी का साथ
विजय ने हमेशा बीजेपी को अपनी वैचारिक दुश्मन बताया है। फिल्म ‘जन नायकन’ के विवाद और करूर भगदड़ कांड के बाद बीजेपी और विजय के बीच तलवारें खिंची रही हैं। विजय जानते हैं कि तमिलनाडु के कोर वोटर्स के बीच अपनी जगह बनाने के लिए उन्हें बीजेपी से दूरी रखनी होगी। हालांकि, राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता, लेकिन विजय के लिए बीजेपी का साथ लेना उनके भविष्य के राजनीतिक ग्राफ को नुकसान पहुंचा सकता है। अब देखना होगा कि ‘ब्लॉकबस्टर’ एंट्री करने वाले विजय अपनी सरकार की स्क्रिप्ट कैसे लिखते हैं।


