सीजी भास्कर, 23 मई। सरगुजा जिले के मैनपाट ब्लॉक में एक बहू अपनी 90 वर्षीय सास को पीठ पर लादकर करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंची। वृद्धा को कई महीनों से पेंशन नहीं मिल रही थी, जिसके बाद केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराने और राशि निकालने के लिए बहू को यह कदम उठाना पड़ा। मामला सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की पहुंच पर सवाल खड़े हो गए हैं। (90-year-old woman carried to bank for pension)
तीन महीने की पेंशन लेने बैंक पहुंची वृद्धा : 90-year-old woman carried to bank for pension
कुनिया गांव के जंगलपारा निवासी सुखमनिया अपनी सास सोनवारी को पीठ पर उठाकर सेंट्रल बैंक पहुंची। बैंक में वृद्धा को तीन महीने की पेंशन के रूप में 1500 रुपये दिए गए। जानकारी के अनुसार, सोनवारी के खाते में चार महीने की पेंशन राशि जमा हुई थी, लेकिन नियमित रूप से पैसा नहीं मिल पा रहा था।
बहू सुखमनिया ने बताया कि पहले बैंक मित्र घर पहुंचकर राशि दे देते थे, लेकिन बाद में उन्होंने घर आना बंद कर दिया। गांव तक सड़क और वाहन की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें पैदल ही सास को लेकर बैंक जाना पड़ा।
महतारी वंदन योजना का लाभ नहीं
परिजनों के मुताबिक सोनवारी को महतारी वंदन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्हें केवल वृद्धावस्था पेंशन के रूप में हर महीने 500 रुपये मिलते हैं। जंगलपारा तक पहुंचने के रास्ते में नाला और खराब रास्ता होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते।
गर्मी और कठिन रास्तों के बीच बुजुर्ग महिला को पीठ पर ढोकर ले जाने की घटना ने ग्रामीण इलाकों की बदहाल व्यवस्था को उजागर कर दिया है।
बैंक प्रबंधन ने दी सफाई : 90-year-old woman carried to bank for pension
नर्मदापुर सेंट्रल बैंक के प्रबंधक मिर्जा अल्ताफ बेक ने कहा कि क्षेत्र में बैंक मित्रों के जरिए घर पहुंच सेवा उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि यदि परिजन सूचना देते हैं तो बैंक मित्र घर जाकर पेंशन राशि पहुंचाते हैं।
बैंक प्रबंधन का कहना है कि परिवार की ओर से सूचना नहीं दी गई थी, इसलिए वे स्वयं वृद्धा को लेकर बैंक पहुंचे। साथ ही आश्वासन दिया गया है कि आगे से बैंक मित्र घर पहुंचकर पेंशन उपलब्ध कराएंगे।



