सीजी भास्कर, 29 मई : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग (Chhattisgarh Shramik Children Free Education) की एक ऐसी हाई-प्रोफाइल और कड़क समीक्षा बैठक संपन्न हुई है, जिसने प्रदेश के बड़े और महंगे निजी स्कूल संचालकों के बीच खलबली मचा दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कड़े रुख और श्रम मंत्री लखन देवांगन के सख्त निर्देशों के बाद अब श्रम विभाग के सचिव सह श्रमायुक्त हिमशिखर गुप्ता ने एक ऐसा आक्रामक फैसला लिया है, जो गरीब निर्माण श्रमिकों के जीवन में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होने जा रहा है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि अब पैसे की कमी के कारण किसी मजदूर के होनहार बच्चे का भविष्य अंधकार में नहीं रहेगा। राज्य के बड़े और नामी निजी स्कूलों में अब गरीब श्रमिकों के बच्चों को न केवल सीधे दाखिला मिलेगा, बल्कि उनके रहने-खाने से लेकर पढ़ाई का छत्तीसगढ़ श्रमिक चिल्ड्रन फ्री एजुकेशन (Chhattisgarh Shramik Children Free Education) के तहत पूरा खर्च खुद सरकार उठाएगी। इस बैठक में सचिव ने मैदानी अधिकारियों को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह का सस्पेंस या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और अगर एक भी अपात्र व्यक्ति को गलत तरीके से लाभ मिला, तो सीधे जिला श्रम पदाधिकारी (LEO) को सस्पेंड कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निजी स्कूलों में मुफ्त आवासीय शिक्षा का चक्रव्यूह
इस बार नए शैक्षणिक सत्र से सरकार ने जो मास्टरप्लान तैयार किया है, उसने इस पूरी योजना को बेहद आक्रामक रूप दे दिया है। मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर प्रारंभ होने जा रहे इस नए सत्र से ‘अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना’ के तहत सीटों की संख्या को सीधे 100 से बढ़ाकर 200 कर दिया गया है। इस योजना का सबसे बड़ा मानवीय और संवेदनशील पहलू यह है कि इसके तहत छत्तीसगढ़ के पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को प्रदेश के सबसे बेहतरीन और नामी निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा।
इन गरीब बच्चों को कक्षा 6वीं से लेकर 12वीं तक देश और प्रदेश के श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों (बोर्डिंग स्कूलों) में पूरी तरह से निःशुल्क शिक्षा प्राप्त होगी। उनकी स्कूल फीस, हॉस्टल का खर्च, किताबें, यूनिफॉर्म और यहां तक कि उनके स्वास्थ्य सुरक्षा (Chhattisgarh Shramik Children Free Education) की पूरी जिम्मेदारी श्रम विभाग वहन करेगा। श्रमायुक्त ने दोटूक कह दिया है कि अधिकारी खुद फील्ड पर उतरकर पात्र बच्चों की पहचान करें ताकि पूंजीपतियों के इन स्कूलों में मजदूर का बच्चा भी सिर उठाकर पढ़ सके।
ठेकेदारों के लाइसेंस की होगी री-चेकिंग
मंत्रालय में हुई इस मैदानी समीक्षा बैठक में सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि श्रमिकों के शोषण को रोकने के लिए भी एक बड़ा आर्थिक चक्रव्यूह रचा गया है। सचिव हिमशिखर गुप्ता ने जिलों से आए सभी श्रम अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे तत्काल मैदानी स्तर पर जांच शुरू करें कि कांट्रेक्टर (ठेकेदार) को जितने श्रमिकों का लाइसेंस प्राप्त है, असलियत में साइट पर उतने ही श्रमिक कार्यरत हैं या नहीं।
अक्सर ठेकेदार कागजों पर कम श्रमिक दिखाकर टैक्स और लेबर सेस की चोरी करते हैं, लेकिन अब इस खेल को पूरी तरह खत्म किया जाएगा। इसके साथ ही, श्रमिकों की जान से खिलवाड़ रोकने और उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा (Chhattisgarh Shramik Children Free Education) को पुख्ता करने के लिए राज्य के सभी कारखानों और औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच करने और सुरक्षा मानकों में कमी पाए जाने पर तत्काल कारखाना सील करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
ऑनलाइन रैंडम निरीक्षण से उड़ेगी भ्रष्ट अधिकारियों की नींद
इस बार की प्रशासनिक सर्जरी इतनी कड़क है कि विभाग के भीतर छिपे काली भेड़ों की भी खैर नहीं है। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए अब ऑनलाईन रेण्डम निरीक्षण प्रणाली को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है, यानी किस अधिकारी को किस फैक्ट्री या कंस्ट्रक्शन साइट की जांच करने जाना है, यह कंप्यूटर तय करेगा। इसके अलावा छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम के अंतर्गत पंजीयन की कड़ाई से समीक्षा की गई। बैठक में सरकार की सबसे महत्वपूर्ण फ्लैगशिप स्कीमों जैसे- मिनी माता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना और मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना (Chhattisgarh Shramik Children Free Education) के तहत पेंडिंग पड़े आवेदनों को समय-सीमा के भीतर निपटाने का अल्टीमेटम दिया गया है।
सुशासन तिहार के आवेदनों पर एक्शन
बैठक के आखिरी दौर में सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों पर जिलेवार की गई निराकरण की रिपोर्ट टेबल पर रखी गई, जिसमें कई जिलों की सुस्त रफ्तार को देखकर सचिव ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना और मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना (Chhattisgarh Shramik Children Free Education) का लाभ बिना किसी लालफीताशाही के सीधे पीड़ितों के बैंक खातों में भेजने को कहा है। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल और असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के माध्यम से अब राज्य के हर असंगठित मजदूर का नया डिजिटल पंजीयन किया जाएगा। सरकार के इस चौतरफा और आक्रामक तेवर से साफ है कि अब छत्तीसगढ़ के श्रमिक परिवारों को उनका असली हक मिलकर रहेगा और उनके बच्चों का भविष्य संवर जाएगा।




