रिपोर्टर – आशुतोष सिंह राजपूत
सीजी भास्कर, 03 जून। गरियाबंद जिले में इन दिनों खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर प्रशासन लगातार नजर बनाए (Seed Blackmarketing) हुए है। खेती की तैयारी में जुटे किसानों के बीच भी बीज की गुणवत्ता और उपलब्धता को लेकर चर्चा बनी हुई है। इसी बीच विभागीय टीम की कार्रवाई के बाद कई बीज विक्रय केंद्रों में हलचल का माहौल देखने को मिला।
औचक निरीक्षण की खबर फैलते ही क्षेत्र के व्यापारियों और किसानों के बीच भी बातचीत का दौर शुरू हो गया। प्रशासन का कहना है कि किसानों तक गुणवत्तायुक्त बीज पहुंचाना और कालाबाजारी पर रोक लगाना उसकी प्राथमिकता है।
चार बीज विक्रय केंद्रों का हुआ निरीक्षण : Seed Blackmarketing
कलेक्टर बीएस उईके के निर्देश और कृषि विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में देवभोग और मैनपुर विकासखंड के चार बीज विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आईं। जांच में बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 और बीज नियंत्रण आदेश 1983 के निर्धारित प्रावधानों के उल्लंघन की बात सामने आई।
बिना दस्तावेज और अनुमति के मिला बीज भंडारण
निरीक्षण के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में अघोषित स्थानों पर बीज भंडारण पाया गया। वहीं कई जगहों पर बिना स्त्रोत प्रमाण पत्र के बीज विक्रय किए जाने की जानकारी (Seed Blackmarketing) मिली। इसके अलावा विक्रय संबंधी अभिलेखों का सही संधारण नहीं करना और मासिक प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करने जैसी कमियां भी दर्ज की गईं।
666 बैग धान बीज की बिक्री पर रोक
कार्रवाई के दौरान तीन प्रतिष्ठानों में उपलब्ध धान बीज को जब्त कर सीलबंद किया गया। साथ ही वहां रखे गए 666 बैग धान बीज के विक्रय पर 10 दिनों के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। विभागीय अधिकारियों ने संबंधित मामलों में नियमानुसार आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
किसानों से अधिकृत विक्रेताओं से खरीद की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद और बीज खरीदें तथा खरीदारी के समय पक्का बिल अवश्य (Seed Blackmarketing) प्राप्त करें। विभाग ने यह भी कहा है कि यदि कहीं अधिक कीमत वसूली जाती है या अनधिकृत रूप से व्यवसाय संचालित किया जाता है तो इसकी जानकारी तत्काल अधिकारियों को दी जाए।
अफवाहों से बचने की सलाह
प्रशासन ने किसानों से किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी या अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। किसी समस्या की स्थिति में किसान कृषि विभाग के अधिकारियों, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों, सहकारी समितियों अथवा जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष से सीधे संपर्क कर सकते हैं।




