सीजी भास्कर, 04 जून। हैदराबाद में पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल कर लोगों को डराने और वसूली करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश (Fake Police) हुआ है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। आरोपी खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे और फिर उन्हें धमकाकर रकम वसूलते थे। लंबे समय से सक्रिय इस गिरोह की करतूतें सामने आने के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
जांच में पता चला कि गिरोह खास तौर पर व्यापारियों और आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को निशाना बनाता था। पुलिस की वर्दी, पहचान पत्र और सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को अपने साथ ले जाया जाता था। इसके बाद उनसे नकदी और ऑनलाइन माध्यम से रकम वसूली जाती थी।
चार आरोपी गिरफ्तार, दो अब भी फरार : Fake Police
साइबराबाद पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह में कुल छह सदस्य शामिल थे, जिनमें से दो आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। गिरफ्तार आरोपियों के तार अलग अलग राज्यों से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस फरार सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
व्यापारी को बनाया था निशाना
मामले का खुलासा एक व्यापारी की शिकायत के बाद हुआ। पीड़ित ने बताया कि कुछ लोगों ने रास्ते में रोककर खुद को पुलिसकर्मी बताया और कहा कि उसके खिलाफ दूसरे राज्य में मामला दर्ज है। इसके बाद उसे जांच के नाम पर जबरन अपने साथ ले जाया गया। आरोपी उसे एक वाहन में बैठाकर दूसरे शहर तक ले गए और वहां रकम निकालने का दबाव बनाया।
लाखों रुपये की कराई वसूली
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित से पहले नकद राशि निकलवाई। इसके बाद ऑनलाइन माध्यम से भी लाखों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। रकम हासिल करने के बाद आरोपियों ने उसका मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया और बाद में उसे छोड़कर फरार हो गए।
पुलिस की वर्दी और पहचान पत्र का इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार गिरोह लोगों को धोखा देने के लिए नकली पहचान पत्र, वर्दी और रैंक बैज का उपयोग करता था। पहली नजर में आरोपियों को देखकर लोगों को उन पर शक नहीं होता था। यही वजह थी कि वे आसानी से लोगों को अपने झांसे में लेने में सफल हो जाते थे।
छापे में मिले हथियार और दस्तावेज
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई अहम सामान बरामद (Fake Police) किए हैं। इनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, हथियार, पुलिस की वर्दियां, नकली पहचान पत्र, हथकड़ियां, मुहरें और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने इससे पहले कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और उनकी गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं।
कई राज्यों से जुड़े मिले तार
प्रारंभिक जांच में आरोपियों के संबंध अलग अलग राज्यों से सामने आए हैं। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और लोगों में पुलिस कार्रवाई का डर पैदा कर उनसे वसूली करता था। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और फरार सदस्यों की तलाश के लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं।




