सीजी भास्कर, 19 जून : खरीफ सीजन के बीच यूरिया और डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों (Fertilizer Crisis Chhattisgarh) का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। खाद नहीं मिलने से परेशान किसानों ने शुक्रवार को ग्राम पैलीमेटा में चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने नारेबाजी करते हुए समय पर खाद उपलब्ध कराने और वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई।
बुवाई के समय खाद संकट से बढ़ी किसानों की चिंता
किसानों का कहना है कि खरीफ फसलों की बुवाई का सबसे महत्वपूर्ण दौर चल रहा है, लेकिन खाद वितरण केंद्रों में यूरिया और डीएपी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। कई दिनों से किसान खाद के लिए केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, फिर भी उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है। इससे बुवाई और खेती के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि वितरण व्यवस्था में भारी अव्यवस्था है, जिसके कारण वास्तविक किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों ने संभाला मोर्चा
किसानों के आंदोलन का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य निर्मला विजय वर्मा, जिला महामंत्री लाल रोहित सिंह पुलस्त्य और जनपद सदस्य प्रेमलाल साहू ने किया। आंदोलन को समर्थन देने खैरागढ़ विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा और पूर्व विधायक छन्नी साहू भी मौके पर पहुंचीं।
विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा ने कहा कि किसानों को खेती के लिए आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। खाद की कमी से किसानों की फसल, उत्पादन और आय तीनों प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की।
प्रशासन से उठी पारदर्शी वितरण व्यवस्था की मांग
प्रदर्शनकारी किसानों ने मांग की कि जिले में खाद की आपूर्ति बढ़ाई जाए और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े। किसानों का कहना है कि यदि बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में खाद उपलब्ध नहीं हुई तो इसका सीधा असर खरीफ उत्पादन पर पड़ेगा।
बढ़ सकता है आंदोलन
किसानों ने साफ कहा कि यदि आने वाले दिनों में खाद संकट दूर नहीं हुआ तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल प्रशासन की ओर से किसानों को जल्द पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन किसान अब जमीनी स्तर पर समाधान चाहते हैं।





