सीजी भास्कर, 21 जून : छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों से शिक्षा व्यवस्था (School Building Crisis ) की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। एक ओर दंतेवाड़ा जिले के लावा गांव में पहली बार स्कूल खुलने से ग्रामीणों में खुशी और उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी ओर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शिवपुरी गांव में वर्षों से अधूरा पड़ा स्कूल भवन बच्चों की पढ़ाई में बड़ी बाधा बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि विद्यार्थियों को खुले आसमान के नीचे पेड़ की छांव में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। यह तस्वीरें बताती हैं कि शिक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है, लेकिन कई क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पहली बार स्कूल खुला, गांव में खुशी का माहौल
दंतेवाड़ा जिले के लावा गांव में पहली बार स्कूल की शुरुआत हुई है। स्कूल भवन का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन ग्रामीणों ने बच्चों की पढ़ाई शुरू कराने को प्राथमिकता दी है। गांव के लोगों का कहना है कि भवन बाद में भी बन जाएगा, लेकिन बच्चों की शिक्षा रुके नहीं, यह सबसे जरूरी है।
फिलहाल स्कूल में 15 विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है और उनकी पढ़ाई के लिए दो शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। जब तक भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक कक्षाएं पेड़ के नीचे अथवा गांव के किसी घर में संचालित करने की व्यवस्था बनाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से गांव में स्कूल की मांग की जा रही थी। अब स्कूल शुरू होने से बच्चों को दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा और शिक्षा तक उनकी पहुंच आसान होगी।
अधूरे भवन के कारण खुले में पढ़ाई को मजबूर बच्चे
दूसरी ओर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शिवपुरी गांव में स्थिति बिल्कुल अलग है। यहां स्कूल भवन का निर्माण वर्षों पहले शुरू हुआ था, लेकिन आज तक पूरा नहीं हो सका। भवन का केवल एक हिस्सा तैयार हो पाया है, जबकि आवश्यक सुविधाएं अब भी नदारद हैं। स्कूल में बिजली, पंखे और पर्याप्त कक्षाओं की व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। शिक्षक भी खुले में बैठकर बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल भवन निर्माण के लिए करीब 10 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन निर्माण एजेंसी की लापरवाही और कार्य में देरी के कारण आज तक भवन पूर्ण नहीं हो सका।
शिक्षकों और ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई किसी भी हालत में नहीं रुकनी चाहिए, इसलिए सीमित संसाधनों में भी शिक्षण कार्य जारी रखा गया है। हालांकि उनका मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहतर भवन, बिजली, फर्नीचर और अन्य मूलभूत सुविधाएं बेहद जरूरी हैं। शिक्षकों का कहना है कि गर्मी और बारिश के मौसम में खुले में पढ़ाई कराना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
प्रशासन से जल्द समाधान की मांग
दोनों क्षेत्रों के ग्रामीणों ने प्रशासन से स्कूल भवनों के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार लगातार नए प्रयास कर रही है, लेकिन इन प्रयासों का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब बच्चों को सुरक्षित और सुविधायुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि शिक्षा केवल स्कूल खोलने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।





