सीजी भास्कर, 03 जुलाई : अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले कई सालों से शांतिपूर्ण गुहार लगा रहे प्रदेश के अतिथि शिक्षकों (Vidyamitan Atithi Shikshak Strike) के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। प्रांतीय अतिथि शिक्षक विद्यामितान कल्याण संघ के आह्वान पर दुर्ग सहित समूचे छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। ‘संविलियन’ और ‘समान कार्य-समान वेतन’ जैसी मूलभूत मांगों को लेकर अड़े इन शिक्षकों ने पूरी तरह से काम बंद कर दिया है। इस चौतरफा हड़ताल के कारण दुर्ग सहित पूरे प्रदेश के शासकीय स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह ठप होने और ताले लटकने की नौबत आ गई है।
12 वर्षों से बस्तर के जंगलों से लेकर मैदानी इलाकों तक सेवा
आंदोलनकारी शिक्षकों ने सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वे पिछले 12 वर्षों से अपनी जवानी के सबसे महत्वपूर्ण साल इस विभाग को दे चुके हैं। बस्तर के नक्सल प्रभावित सुदूर अंचलों से लेकर राज्य के कोने-कोने में उन्होंने बच्चों का भविष्य संवारा है। उनसे स्कूलों में नियमित शिक्षकों की तरह न केवल पूरा अध्यापन कार्य कराया जाता है, बल्कि तमाम गैर-शैक्षणिक और विभागीय जिम्मेदारियां भी जबरन थोपी जाती हैं। लेकिन जब अधिकार देने की बात आती है, तो सरकार उन्हें महज 20 हजार रुपये के ऊंट के मुंह में जीरा समान मानदेय पर टरका देती है। शिक्षकों का सीधा सवाल है कि जब काम बराबर है, तो उनके साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?
बंधुआ मजदूरों जैसी स्थिति से भड़का आक्रोश
वर्तमान में प्रदेशभर के विभिन्न स्कूलों में लगभग 1532 विद्यामितान अतिथि शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। संघ के पदाधिकारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की आकस्मिक या अन्य अवकाश की सुविधा तक नसीब नहीं है। बीमारी या आपातकालीन स्थिति में भी उनके पास कोई सामाजिक या आर्थिक सुरक्षा कवच नहीं है। शिक्षकों ने साफ किया कि वे अपनी पीड़ा लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के चौखट पर भी मत्था टेक चुके हैं, लेकिन वहां से सिर्फ खोखले आश्वासनों के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। इसी प्रशासनिक बेरुखी के कारण मजबूरन उन्हें सड़कों पर उतरकर यह उग्र रास्ता चुनना पड़ा है।
जब तक मांगें पूरी नहीं, तब तक स्कूल नहीं लौटेंगे शिक्षक
हड़तालियों ने दोटूक लफ्जों में चेतावनी दी है कि इस बार वे किसी भी झूठे वादे के झांसे में नहीं आने वाले हैं। जब तक उनके संविलियन और सम्मानजनक वेतनमान पर सरकार कोई ठोस और लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक यह कलमबंद हड़ताल और उग्र आंदोलन अनवरत जारी रहेगा। इधर, शिक्षकों के इस बढ़ते आक्रोश को देखते हुए विपक्ष ने भी इसे बड़ा सियासी मुद्दा बना लिया है। दुर्ग जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल खुद भारी लाव-लश्कर के साथ आंदोलन स्थल पर पहुंचे और शिक्षकों की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार के खिलाफ इस लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने का खुला ऐलान कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी आक्रामक रूप ले सकता है।



