सीजी भास्कर, 03 जुलाई : राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियां (Governor Powers Verdict) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 161 (Article 161) के तहत राज्यपाल को प्राप्त सजा में राहत, रिमिशन या माफी देने की शक्ति स्वतंत्र और संवैधानिक है। इसे किसी कानूनी नीति या प्रशासनिक प्रावधान के जरिए सीमित या समाप्त नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 161 की शक्ति सर्वोपरि, बाद की नीति नहीं करेगी प्रभावित
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वर्ष 2002 की सजा माफी नीति, जिसे अनुच्छेद 161 (Article 161) के तहत लागू किया गया था, बाद में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत वर्ष 2008 में बनाई गई नीति से स्वतः समाप्त नहीं मानी जा सकती।
अदालत ने कहा कि राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियां (Governor Powers Verdict) किसी वैधानिक नीति या प्रशासनिक व्यवस्था के अधीन नहीं हैं और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को सामान्य कानून के जरिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
उम्रकैद कैदी की याचिका पर आया अहम फैसला
यह फैसला एक उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी की याचिका पर सुनाया गया, जिसने समयपूर्व रिहाई की मांग की थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि मामले पर विचार राज्यपाल के समक्ष किया जाना चाहिए था, जबकि राज्य सरकार ने CrPC के तहत प्रक्रिया अपनाई थी।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अनुच्छेद 161 के तहत उपलब्ध संवैधानिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
दया याचिका और सजा माफी का अधिकार स्वतंत्र
सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल को संविधान के तहत प्राप्त दया याचिका और सजा माफी से जुड़े अधिकार पूरी तरह स्वतंत्र हैं। राज्य सरकार की रिमिशन नीति या अन्य प्रशासनिक नियम राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियों को प्रभावित नहीं कर सकते।
राज्यपाल निभाते हैं कई महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारियां
अदालत ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि राज्यपाल को संविधान के तहत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां प्राप्त हैं। इनमें सरकार गठन, विधानसभा सत्र बुलाना या स्थगित करना, विधेयकों को मंजूरी देना या राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखना, अध्यादेश जारी करना, मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद की नियुक्ति, राष्ट्रपति शासन की सिफारिश तथा विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में दायित्व निभाना शामिल है।
भविष्य के मामलों में बनेगा महत्वपूर्ण आधार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियां (Governor Powers Verdict) संविधान से प्राप्त विशेष अधिकार हैं, जिन्हें किसी सामान्य कानूनी नीति के माध्यम से सीमित नहीं किया जा सकता। माना जा रहा है कि यह फैसला भविष्य में सजा माफी, दया याचिका और राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल साबित होगा।



