सीजी भास्कर, 03 जुलाई : जो जवान देश की सीमाओं (Indian Army Soldier Land Dispute) पर अपनी जान हथेली पर रखकर 140 करोड़ देशवासियों की सुरक्षा करता है, आज वही सैनिक अपने ही घर तक पहुंचने के लिए पिछले 5 सालों से सिस्टम और दबंगई के आगे बेबस है।” यह दर्दनाक और बेहद शर्मनाक हकीकत दुर्ग जिले के अहिवारा नगर पालिका क्षेत्र से सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में भारतीय सेना की 136 फील्ड रेजिमेंट में तैनात वीर जवान राममोहन यादव आज अपने हक के रास्ते के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
40 साल पुराने रास्ते पर पड़ोसी ने ठोंका ताला
अहिवारा के वार्ड क्रमांक-7 निवासी सैनिक (Indian Army Soldier Land Dispute) राममोहन यादव का परिवार पिछले 40 वर्षों से इस मकान में सम्मानपूर्वक निवास कर रहा है। वर्षों से उनके घर आने-जाने का एक निर्धारित रास्ता पड़ोसी के मकान के कोने से होकर जाता था। सैनिक का आरोप है कि आसपास की कथित सरकारी भूमि की अवैध रूप से खरीद-बिक्री करने के बाद, उनके पड़ोसी ने दादागिरी दिखाते हुए वहां एक बड़ा गेट लगा दिया और सैनिक के परिवार का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया। इतना ही नहीं, जब सैनिक सीमा पर देश की रक्षा कर रहा था, तब उसकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर उसके मकान के एक हिस्से को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
छुट्टी खत्म होते ही फौजी गया ड्यूटी पर
पीड़ित जवान ने बताया कि जब इस अवैध निर्माण की शुरुआत हुई थी, तब उन्होंने देश सेवा की छुट्टी से समय निकालकर तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष और राजस्व अधिकारियों के चक्कर काटे थे। अधिकारियों ने उस वक्त मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। मजबूरन छुट्टी समाप्त होने पर देश सेवा के लिए राममोहन को राजौरी बॉर्डर पर लौटना पड़ा। जैसे ही जवान सीमा पर गया, पीछे से प्रशासन और दबंगों की साठगांठ से रास्ता पूरी तरह सील कर दिया गया। बाद में नगर पालिका ने अस्थायी रूप से पानी टंकी परिसर से रास्ता दिया, लेकिन बाद में उसे भी ‘संवेदनशील क्षेत्र’ का खोखला बहाना बनाकर बंद कर दिया गया।
CM और गृह मंत्री तक पहुंची गूंज
एक तरफ सरकारें सैनिकों (Indian Army Soldier Land Dispute) के सम्मान के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं दूसरी तरफ राममोहन यादव के मकान का वैध पट्टा होने और नियमित रूप से सभी सरकारी टैक्स जमा करने के बावजूद उनका परिवार पिछले 5 साल से अपने ही घर में कैद होने को मजबूर है। जवान जब भी छुट्टी पर घर आता है, उसे केवल आश्वासन का झुनझुना थमा दिया जाता है, जिससे वे गहरे मानसिक तनाव में हैं। थक-हारकर सैनिक ने दुर्ग कलेक्टर के ‘जनदर्शन’ में उपस्थित होकर इस पूरे लैंड सिंडिकेट और बंद रास्ते की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फौजी ने इस शिकायती आवेदन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री और नगर पालिका अध्यक्ष को भी भेजकर सीधे कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि बहरे और अंधे हो चुके इस सिस्टम की नींद कब खुलती है और देश के रक्षक को उसका हक कब मिलता है।



