सीजी भास्कर, 17 जुलाई : बस्तर की ऐतिहासिक गोंचा रथयात्रा (Bastar Goncha Rath Yatra) के दौरान गुरुवार को जगदलपुर में बड़ा हादसा हो गया। भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र की भव्य रथयात्रा के दौरान भीड़ के बीच एक करीब 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला रथ के पहिए के नीचे आ गई। महिला का एक हाथ पहिए के नीचे आने से वह घायल हो गई। मौके पर मौजूद पुलिस जवानों और श्रद्धालुओं ने तत्परता दिखाते हुए महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। घटना का वीडियो भी सामने आया है।
- Bastar Goncha Rath Yatra रथ खींचने के दौरान हुआ हादसा
- जगन्नाथ मंदिर से निकली थी भव्य रथयात्रा
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- 22 देव विग्रह तीन रथों में हुए विराजमान
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- तुपकी सलामी बनी आकर्षण का केंद्र
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- 619 साल पुरानी है गोंचा पर्व की परंपरा
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- 29 जून से शुरू हुआ था गोंचा पर्व
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Bastar Goncha Rath Yatra रथ खींचने के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, घायल महिला जगदलपुर के धरमपुरा क्षेत्र की रहने वाली हैं। रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। इसी दौरान रथ खींचते समय महिला अचानक पहिए के पास पहुंच गई और हादसे का शिकार हो गई। पुलिस ने तत्काल उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर कर दिया गया।
कोतवाली थाना प्रभारी लीलाधर राठौर ने बताया कि रथयात्रा के दौरान भीड़ काफी अधिक थी। इसी बीच हादसा हुआ, लेकिन पुलिस और श्रद्धालुओं की सतर्कता से महिला को सुरक्षित निकाल लिया गया।

जगन्नाथ मंदिर से निकली थी भव्य रथयात्रा
Bastar Goncha Rath Yatra के तहत सिरहासार भवन के सामने स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र की पारंपरिक रथयात्रा निकाली गई। सैकड़ों श्रद्धालु रथयात्रा में शामिल हुए और पूरे मार्ग में जय जगन्नाथ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ होकर गोलबाजार, दंतेश्वरी मंदिर चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सिरहासार भवन पहुंची, जिसे जनकपुरी के रूप में सजाया गया है।
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22 देव विग्रह तीन रथों में हुए विराजमान
गोंचा पर्व के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र सहित कुल 22 देव विग्रहों को तीन अलग-अलग रथों में विराजमान किया गया। पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद रथयात्रा प्रारंभ हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने और रथ खींचने पहुंचे। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, शंखध्वनि और जयकारों के बीच धार्मिक उत्साह देखने को मिला।
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तुपकी सलामी बनी आकर्षण का केंद्र
Bastar Goncha Rath Yatra की सबसे खास परंपरा तुपकी सलामी भी निभाई गई। श्रद्धालुओं ने बांस से बनी पारंपरिक तुपकी के माध्यम से भगवान जगन्नाथ को सलामी दी। बस्तर की यह सदियों पुरानी परंपरा आज भी गोंचा पर्व का प्रमुख आकर्षण मानी जाती है।
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619 साल पुरानी है गोंचा पर्व की परंपरा
मान्यता के अनुसार गोंचा पर्व की परंपरा लगभग 619 वर्ष पुरानी है। कहा जाता है कि बस्तर के तत्कालीन राजा पुरुषोत्तम देव पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुंचे थे, जहां उन्हें रथपति की उपाधि के साथ 16 पहियों वाला विशाल रथ भेंट किया गया था। बस्तर लौटते समय रथ को तीन भागों में विभाजित किया गया और बाद में उन्हीं रथों का उपयोग बस्तर दशहरा तथा गोंचा पर्व में होने लगा। तभी से यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है।
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29 जून से शुरू हुआ था गोंचा पर्व
इस वर्ष गोंचा पर्व की शुरुआत 29 जून को देव स्नान पूर्णिमा के साथ हुई थी। इसके बाद भगवान अनसर काल में रहे और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद रहे। 15 जुलाई को नेत्रोत्सव के बाद भगवान ने भक्तों को दर्शन दिए और 16 जुलाई को पारंपरिक रथयात्रा निकाली गई। इसी दौरान यह हादसा हुआ, हालांकि समय रहते पुलिस और श्रद्धालुओं की तत्परता से बुजुर्ग महिला की जान बचा ली गई।
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