सीजी भास्कर, 22 जुलाई : छत्तीसगढ़ की जलवायु के अनुरूप अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता वाली आम की नई किस्में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में आम की नई किस्मों (Mango Research) पर वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया है। इसके तहत 15 से 20 नई वैरायटी का परीक्षण किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसानों को अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्में उपलब्ध कराई जा सकें।
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6 साल बाद मिल सकती हैं नई किस्में
वैज्ञानिकों के अनुसार आम की नई किस्मों (Mango Research) पर किए जा रहे इस अध्ययन में पौधों की वृद्धि, फल की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और स्थानीय जलवायु के अनुकूलता का विस्तृत परीक्षण होगा। यदि शोध सफल रहता है तो करीब छह वर्ष बाद प्रदेश के किसानों को नई और उन्नत किस्मों के पौधे उपलब्ध कराए जा सकेंगे, जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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85 किस्मों का संरक्षण, अब 20 नई वैरायटी पर फोकस
वर्तमान में अनुसंधान केंद्र में आम की करीब 85 किस्मों का संरक्षण किया गया है। इनमें लंगड़ा, दशहरी, अल्फांसो, आम्रपाली, नीलम, सुंदरजा, सिंदूरी, मल्लिका और तोतापरी जैसी 65 पारंपरिक किस्मों पर अध्ययन पूरा हो चुका है। अब टॉमी एटकिन, सेंसेशन, हुसनारा, स्वर्णरेखा, अर्कापुनीत, जहांगीर, हल्दी खास, कोहिनूर, गुलाब खास और बनराज जैसी नई वैरायटी पर वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है।
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उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर होगी निगरानी
वैज्ञानिक नई किस्मों में पौधों की वृद्धि, फूल और फल आने का समय, स्वाद, रंग, आकार, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता का मूल्यांकन करेंगे। उद्देश्य ऐसी किस्मों का चयन करना है, जो व्यावसायिक खेती के लिए अधिक लाभदायक होने के साथ छत्तीसगढ़ की जलवायु में बेहतर प्रदर्शन करें।
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प्रसंस्करण उद्योग को भी मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि आम का उपयोग केवल ताजे फल के रूप में ही नहीं, बल्कि अचार, जैम, जेली, जूस, टॉफी और अन्य प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्माण में भी किया जाता है। बेहतर गुणवत्ता वाली नई किस्मों के विकसित होने से प्रसंस्करण उद्योग को भी फायदा मिलेगा और किसानों के लिए नए बाजार तैयार होंगे।
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बदलती बाजार मांग को ध्यान में रखकर शोध
वैज्ञानिकों के अनुसार उपभोक्ताओं की पसंद लगातार बदल रही है। बाजार में आकर्षक रंग, बेहतर स्वाद, बड़े आकार और उच्च गुणवत्ता वाले आमों की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए नई वैरायटी विकसित करने पर काम किया जा रहा है, ताकि किसान आधुनिक किस्मों की खेती कर अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा कमा सकें।



