सीजी भास्कर, 28 जुलाई : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा घोटाला (Snake Bite Compensation Scam) मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। 17 करोड़ रुपये के कथित फर्जी मुआवजा मामले में तहसील कार्यालय के तीन राजस्व लिपिकों को निलंबित किया गया है। वहीं, आठ अन्य कर्मचारियों से पूछताछ होनी बाकी है। इसी बीच कर्मचारी संगठनों ने गिरफ्तारी का विरोध शुरू कर दिया है।
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तीन लिपिक गिरफ्तार, भेजे गए जेल
पुलिस ने तहसील कार्यालय के कर्मचारी गरीब बिंझवार, नरेंद्र कौशिक और हरिराम राठौर को गिरफ्तार किया है। इसके बाद तीनों को जेल भेज दिया गया। इससे पहले गोविंद विश्वकर्मा, वकील खांडेकर और डॉ. प्रियंका सोनी को भी गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल, जांच एजेंसियां सर्पदंश मुआवजा घोटाला (Snake Bite Compensation Scam) मामले में जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही हैं।
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हड़ताल से राजस्व कार्य प्रभावित
गिरफ्तार कर्मचारियों के समर्थन में तहसील कार्यालय के कर्मचारियों ने एक दिन काम बंद रखा। इसके कारण सीमांकन, नामांतरण और बंटवारा जैसे काम प्रभावित हुए। वहीं, दूर-दराज से आए लोगों को बिना काम कराए लौटना पड़ा। हालांकि, तहसीलदार कार्यालय में मौजूद रहे।
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कर्मचारी संघ ने उठाए सवाल
राजस्व लिपिक संघ ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। संघ का कहना है कि कर्मचारियों को पहले बयान के लिए बुलाया गया था। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं, आठ अन्य लिपिकों को भी बयान के लिए नोटिस दिया गया है। संघ के अनुसार इससे कर्मचारियों में डर का माहौल है।
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निष्पक्ष जांच की मांग
कर्मचारी संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोष साबित होने से पहले सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, संघ ने अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा है।
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रिकॉर्ड संभालने तक सीमित थी भूमिका
संघ का कहना है कि मुआवजा देने का अंतिम फैसला अधिकारियों का होता है। वहीं, लिपिकों का काम केवल दस्तावेज तैयार करना और रिकॉर्ड संभालना होता है। इसलिए केवल दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को आरोपी बनाना सही नहीं है।
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सामूहिक अवकाश की चेतावनी
कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि मांग पूरी नहीं हुई तो राजस्व लिपिक सामूहिक अवकाश पर जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में राजस्व विभाग का काम प्रभावित हो सकता है।
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फर्जी दस्तावेज से मुआवजा देने का आरोप
गौरतलब है कि बिलासपुर में सर्पदंश से मौत के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर मुआवजा देने का मामला सामने आया था। विधानसभा में मामला उठने के बाद सरकार ने जांच के निर्देश दिए थे। अब तक इस सर्पदंश मुआवजा घोटाला (Snake Bite Compensation Scam) मामले में डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील कर्मचारियों सहित 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। फिलहाल, जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।



