सीजी भास्कर, 28 जुलाई। Korba News के तहत कोरबा पुलिस को बड़ी सफलता (Parole Absconding) मिली है। हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा एक दोषी पैरोल पर रिहा होने के बाद छह साल तक फरार रहा। पुलिस ने आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि फरारी के दौरान वह एक औद्योगिक संयंत्र की ठेका कंपनी में काम कर रहा था।
इस कार्रवाई के बाद औद्योगिक इकाइयों में कर्मचारियों के चरित्र सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, फरार दूसरे दोषी की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

पिता की हत्या के मामले में हुई थी सजा Parole Absconding
पुलिस के अनुसार, मामला बालको थाना क्षेत्र के परसाभाठा का है। वर्ष 2007 में दरोगा कुर्मे अपने घर में मृत मिले थे। जांच के दौरान उनके बेटों देवानंद कुर्मे और सूरज कुर्मे की संलिप्तता सामने आई थी। दोनों आरोपियों को हत्या, घर में घुसकर अपराध करने और साझा आपराधिक मंशा से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास और 12-12 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्हें बिलासपुर सेंट्रल जेल भेजा गया।
पैरोल पर छूटने के बाद नहीं लौटे जेल
वर्ष 2020 में दोनों दोषियों को पैरोल पर रिहा किया गया था। उन्हें 7 अप्रैल को जेल से छोड़ा गया था और 1 मई तक वापस आत्मसमर्पण करना था। लेकिन तय समय पर दोनों जेल नहीं लौटे और फरार हो गए। इसके बाद पुलिस उनकी तलाश में लगातार जुटी रही।
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ठेका कंपनी में कर रहा था नौकरी Parole Absconding
एसपी सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर एएसपी लखन पटले, सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी और बालको थाना पुलिस ने फरार कैदियों की तलाश शुरू की। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने देवानंद कुर्मे को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि पैरोल पर रिहा होने के बाद वह पहले बलीदा क्षेत्र स्थित अपने गांव गया और बाद में कोरबा लौटकर एक औद्योगिक संयंत्र के भीतर संचालित ठेका कंपनी में काम करने लगा। नौकरी के लिए उसने आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए थे।
दूसरे आरोपी की तलाश तेज
पुलिस के अनुसार, दूसरा फरार दोषी सूरज कुर्मे अभी भी गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
फरार सजायाफ्ता कैदी का वर्षों तक औद्योगिक संयंत्र में काम करना सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के चरित्र सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े (Parole Absconding) करता है। अब पुलिस और संबंधित एजेंसियां यह भी जांच करेंगी कि आपराधिक पृष्ठभूमि की पुष्टि किए बिना उसे नौकरी कैसे मिल गई और सत्यापन प्रक्रिया में कहां चूक हुई।
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