सीजी भास्कर, 08 अगस्त : कभी खेती (Tomato Farming) को केवल गुजर-बसर का साधन मानने वाले छोटे और सीमांत किसानों के लिए आधुनिक कृषि तकनीक नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। सीमित संसाधनों और कम जमीन में वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी आमदनी भी हासिल कर सकते हैं।
ऐसी ही मिसाल एक महिला किसान ने पेश की है। उन्होंने हाइब्रिड टमाटर की खेती में आधुनिक तकनीक अपनाकर उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हासिल की। खेत में ड्रिप (टपक) सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से फसल को पर्याप्त पानी, पोषण और संरक्षण मिला। इससे खेती अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बनी।
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आधुनिक तकनीक से शुरू की टमाटर की खेती
कोरबा जिले के विकासखंड कोरबा अंतर्गत ग्राम पतरापाली की महिला किसान श्रीमती राजश्री मार्काे ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के माध्यम से विभागीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद वर्ष 2024-25 में उन्होंने 1.20 हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड टमाटर की खेती शुरू की। उन्होंने खेत में ड्रिप (Drip Irrigation) सिंचाई प्रणाली और मल्चिंग शीट का उपयोग किया।

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ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) के जरिए पौधों की जड़ों तक आवश्यकता के अनुसार पानी और घुलनशील उर्वरक पहुंचाया गया। वहीं मल्चिंग शीट के इस्तेमाल से खेत में नमी लंबे समय तक बनी रही और खरपतवार को नियंत्रित करने में मदद मिली। इससे फसल को बेहतर वातावरण मिला।
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100 से 120 टन तक हुआ टमाटर का उत्पादन
आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का असर उत्पादन पर भी दिखाई दिया। महिला किसान ने एक सीजन में लगभग 100 से 120 टन उच्च गुणवत्ता वाले टमाटर का उत्पादन प्राप्त किया। उपज को बाजार में बेचने के बाद उन्होंने करीब 8 से 10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
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यह उपलब्धि उनके लिए सिर्फ आर्थिक सफलता नहीं है, बल्कि पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तरीके अपनाने का परिणाम भी है। टमाटर की खेती (Tomato Farming) में बेहतर उत्पादन मिलने के बाद अब आसपास के किसान भी आधुनिक तकनीकों को समझने और अपनाने के लिए उनके खेत का रुख कर रहे हैं।
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कम पानी में बेहतर उत्पादन और कम लागत
ड्रिप सिंचाई प्रणाली (Drip Irrigation) से पानी का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से हुआ। पौधों की जड़ों तक जरूरत के अनुसार पानी और पोषक तत्व पहुंचने से पानी की बचत हुई। साथ ही फसल को पर्याप्त पोषण मिलने से पौधों का विकास भी बेहतर हुआ।
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मल्चिंग शीट के इस्तेमाल से खेत में खरपतवार का अंकुरण काफी हद तक नियंत्रित रहा। इससे निराई-गुड़ाई के लिए अतिरिक्त श्रम की जरूरत कम हुई और खेती की लागत में भी कमी आई। खेत में नमी लंबे समय तक बने रहने से फसल को अनुकूल वातावरण मिला।
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तकनीक से बढ़ा महिला किसान का आत्मविश्वास
नई तकनीक से बेहतर परिणाम मिलने के बाद श्रीमती राजश्री मार्काे का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे खुद आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों को अपना रही हैं और आसपास के किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके खेत को देखने और तकनीकों को समझने के लिए क्षेत्र के किसान पहुंच रहे हैं।
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उनकी सफलता यह संदेश देती है कि वैज्ञानिक खेती और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर आय हासिल की जा सकती है। आधुनिक खेती (Modern Farming) किसानों की आमदनी बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
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अन्य किसानों के लिए बनीं प्रेरणा
श्रीमती राजश्री मार्काे की सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र के कई किसान अब ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और उन्नत उद्यानिकी फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उद्यानिकी विभाग की ओर से राष्ट्रीय बागवानी मिशन के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
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इस पहल से किसानों को कम पानी और सीमित संसाधनों में बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिल रही है। महिला किसान की यह सफलता ग्रामीण क्षेत्र में आधुनिक कृषि तकनीक के प्रभाव और सरकारी योजनाओं के बेहतर उपयोग की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।



