सीजी भास्कर, 29 अगस्त : भिलाई स्टील प्लांट में कथित लोहा चोरी (BSP Scrap Scam) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम को पत्र लिखकर मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की है। विधायक ने आरोप लगाया है कि बीएसपी में लंबे समय से चल रहे कथित स्क्रैप घोटाले के पीछे बड़ा संगठित नेटवर्क हो सकता है।
- 100 से ज्यादा वाहनों के रिकॉर्ड खंगालने की मांग
- ब्लैकलिस्ट करने के बजाय FIR क्यों नहीं हुई?
- स्क्रैप टेंडर और वजन व्यवस्था की जांच की मांग
- ट्रांसपोर्ट यूनियन के लेन-देन की जांच की मांग
- रसमड़ा की फैक्ट्री का भी पत्र में जिक्र
- छोटे आरोपियों तक सीमित न रहे जांच
- ट्रांसपोर्टरों की संपत्ति और आय की भी जांच हो
- DGP से बड़े नेटवर्क की जांच कराने की मांग
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विधायक ने अपने पत्र में दावा किया है कि बीते करीब 40 वर्षों में बीएसपी से लगभग 10 हजार करोड़ रुपए के लोहे की चोरी हुई है। हालांकि, इस राशि और चोरी की अवधि से जुड़े दावे की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। उन्होंने 100 से अधिक संदिग्ध वाहनों को कथित तौर पर रातों-रात काटे जाने का भी दावा किया है।
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100 से ज्यादा वाहनों के रिकॉर्ड खंगालने की मांग
रिकेश सेन ने कहा कि कथित चोरी में इस्तेमाल किए गए वाहनों की पहचान कर उनके आरटीओ रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। इससे वाहनों के मालिकों और संबंधित ट्रांसपोर्टरों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। विधायक के मुताबिक, पूरे मामले की जांच (BSP Scrap Scam) में वाहनों की भूमिका अहम हो सकती है। उन्होंने संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ट्रांसपोर्टरों और अन्य लोगों से पूछताछ करने की मांग की है।
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ब्लैकलिस्ट करने के बजाय FIR क्यों नहीं हुई?
विधायक ने बीएसपी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि किसी वाहन या ट्रांसपोर्टर को चोरी के दौरान पकड़ा जाता था तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के बजाय केवल ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया क्यों अपनाई गई। उन्होंने इस पूरी व्यवस्था में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच और दोष पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
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स्क्रैप टेंडर और वजन व्यवस्था की जांच की मांग
पत्र में बीएसपी के स्क्रैप टेंडर और प्लांट से बाहर जाने वाले माल की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। विधायक ने पूछा कि स्क्रैप की तौल, रिकॉर्डिंग और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया कितनी प्रभावी थी। उन्होंने सीआईएसएफ और संबंधित अधिकारियों की निगरानी में संभावित लापरवाही की भी जांच कराने की मांग की है।
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ट्रांसपोर्ट यूनियन के लेन-देन की जांच की मांग
रिकेश सेन ने ट्रांसपोर्ट यूनियन से जुड़ी कथित वसूली और आर्थिक लेन-देन की जांच की मांग भी की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर बड़ी रकम की वसूली और उसके बंटवारे की बात सामने आती है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कथित आर्थिक नेटवर्क को बीएसपी स्क्रैप घोटाले (BSP Scrap Scam) से जोड़कर जांच करने की मांग की है।
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रसमड़ा की फैक्ट्री का भी पत्र में जिक्र
विधायक ने रसमड़ा क्षेत्र की एक फैक्ट्री का उल्लेख करते हुए वहां कथित तौर पर बीएसपी से चोरी का लोहा पहुंचने का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस से इस दावे की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। यदि जांच में चोरी के माल की खरीद-बिक्री या भंडारण के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी विधायक ने की है।
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छोटे आरोपियों तक सीमित न रहे जांच
रिकेश सेन ने हाल में हुई एक गिरफ्तारी का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई को पूरे बीएसपी मामले से जोड़कर राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि दशकों से बड़े पैमाने पर चोरी का आरोप है तो जांच केवल छोटे स्तर पर पकड़े गए आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कथित पूरे नेटवर्क और मुख्य सूत्रधारों तक पहुंचना जरूरी है।
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ट्रांसपोर्टरों की संपत्ति और आय की भी जांच हो
विधायक ने उन ट्रांसपोर्टरों की आर्थिक गतिविधियों की जांच की मांग की है, जिन पर लंबे समय से बीएसपी से चोरी के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने संदिग्ध आय और संपत्ति के स्रोत की जांच की मांग की है। विधायक के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की आय और संपत्ति में असामान्य अंतर मिलता है तो उसके आर्थिक स्रोत की भी जांच होनी चाहिए।
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DGP से बड़े नेटवर्क की जांच कराने की मांग
रिकेश सेन ने डीजीपी अरुण देव गौतम से मामले में व्यक्तिगत संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बीएसपी की संपत्ति राष्ट्रीय संपत्ति है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। विधायक की मांग है कि कथित बीएसपी स्क्रैप घोटाले (BSP Scrap Scam) की जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित न रहे। वाहनों, ट्रांसपोर्टरों, स्क्रैप कारोबार, खरीददारों, संबंधित अधिकारियों और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर पूरे मामले की जांच की जाए।
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