सीजी भास्कर, 12 अगस्त। बिलासपुर में एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध के बाद खाद्य-औषधि प्रशासन विभाग ने दूध की गुणवत्ता को लेकर भी निगरानी बढ़ा दी है। शहर में घरों और डेयरी फर्मों तक दूध पहुंचाने वाले विक्रेताओं की जांच की गई। इस दौरान अलग-अलग दूध सप्लायरों से 19 नमूने लिए गए, जिन्हें जांच के लिए रायपुर स्थित लैब भेजा गया है। (Bilaspur Milk Sample Testing)
विभाग की टीम रेस्टोरेंट, ढाबों और डेयरी संचालकों के साथ अब दूध विक्रेताओं की सप्लाई चेन पर भी नजर रख रही है। अधिकारियों के मुताबिक, दूध की गुणवत्ता में कमी होने का असर उससे तैयार होने वाले पनीर, खोवा और अन्य दुग्ध उत्पादों पर भी पड़ सकता है।
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हॉकरों से ली दूध की खरीद और सप्लाई की जानकारी : Bilaspur Milk Sample Testing
जांच के दौरान अधिकारियों ने दूध विक्रेताओं से पूछा कि वे दूध कहां से खरीद रहे हैं और किन-किन स्थानों पर इसकी सप्लाई कर रहे हैं। घरों और डेयरी फर्मों में दूध पहुंचाने वाले हॉकरों से संबंधित जानकारी भी ली गई।
विभाग ने दूध विक्रेताओं को खाद्य-औषधि प्रशासन में आवश्यक पंजीयन कराने के निर्देश दिए। अधिकारियों का कहना है कि खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों का पंजीयन खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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लैब रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
अभियान के तहत लिए गए 19 दूध के नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा गया है। रिपोर्ट में दूध की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार है।
यदि जांच (Bilaspur Milk Sample Testing) में किसी नमूने में मिलावट या गुणवत्ता से जुड़ी कमी सामने आती है तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग दूध से बने उत्पादों की भी लगातार जांच कर रहा है, खास तौर पर अमानक और नकली पनीर की बिक्री पर रोक लगाने के लिए निगरानी जारी है।
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