सीजी भास्कर, 12 अगस्त। छत्तीसगढ़ में बुधवार 12 अगस्त को हरेली तिहार का उत्साह हर तरफ नजर (Hareli Festival) आया। गांवों से लेकर शहरों तक लोगों ने पारंपरिक तरीके से पर्व मनाया। कहीं घरों में पूजा की तैयारी दिखी तो कहीं बच्चे और युवा गेड़ी चढ़ते नजर आए। हरेली के मौके पर छत्तीसगढ़ की मिट्टी, खेती और लोकजीवन से जुड़ी परंपराएं एक बार फिर जीवंत होती दिखाई दीं।
सुबह से ही ग्रामीण इलाकों में पर्व को लेकर चहल पहल रही। किसानों ने खेती में इस्तेमाल होने वाले औजारों को साफ कर उनकी पूजा की। घरों और आंगन में भी परंपरा के मुताबिक तैयारियां की गईं। अच्छी बारिश, बेहतर फसल और परिवार के सुख समृद्धि की कामना के साथ लोगों ने हरेली तिहार मनाया।

खेती के औजारों की पूजा की परंपरा
हरेली को मुख्य रूप से कृषि और किसानों का पर्व माना जाता है। इस दिन किसान अपने हल, नागर, कुदाल, फावड़ा, हंसिया सहित खेती में इस्तेमाल होने वाले औजारों की साफ सफाई करते हैं। इसके बाद इनकी विधि विधान से पूजा की जाती है।
किसानों के लिए यह पर्व खेती से जुड़े औजारों के प्रति सम्मान जताने का अवसर भी है। पूजा के दौरान अच्छी फसल, खेतों में बरकत और परिवार में सुख समृद्धि की कामना की जाती है।
पशुधन और घर की भी होती है विशेष देखभाल Hareli Festival
हरेली के दिन पशुधन की देखभाल को भी खास महत्व दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह गौवंश की पूजा की गई और उन्हें विशेष आहार दिया गया। घरों के दरवाजों पर नीम की पत्तियां लगाने की परंपरा भी इस पर्व से जुड़ी हुई है।
लोकमान्यता के अनुसार नीम को स्वास्थ्य और नकारात्मक प्रभावों से बचाव से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि हरेली के दिन घरों में नीम की पत्तियों का इस्तेमाल परंपरा के तौर पर किया जाता है।
गेड़ी चढ़ना बना बच्चों के लिए खास आकर्षण
हरेली का सबसे खास और आकर्षक हिस्सा गेड़ी चढ़ना माना जाता है। पर्व के दिन गांवों में बच्चे और युवा गेड़ी पर चढ़कर अपनी कला दिखाते हैं। कई स्थानों पर गेड़ी दौड़ और पारंपरिक खेल भी आयोजित किए जाते हैं।
बच्चों के बीच गेड़ी को लेकर खास उत्साह देखने को मिलता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी हरेली के उत्सव को अलग पहचान देती है।

ग्राम देवता से खुशहाली की कामना Hareli Festival
हरेली के अवसर पर ग्रामीण अंचलों में गांव के देवी देवताओं और ग्राम देवता का सुमिरन भी किया जाता है। लोग अच्छी बारिश, बेहतर फसल और गांव में खुशहाली की कामना करते हैं।
यह पर्व केवल पूजा और मनोरंजन तक सीमित नहीं है। हरेली छत्तीसगढ़ की खेती किसानी, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के साथ गहरे जुड़ाव को सामने लाता है। किसान, खेत, पशुधन और प्रकृति इस पर्व के जरिए एक ही सांस्कृतिक धागे में जुड़े नजर आते हैं।
छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ा लोकपर्व
हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की उस लोकपरंपरा को जीवित रखने वाला पर्व है, जिसमें गांव और खेती का जीवन केंद्र में रहता है। बदलते समय के बावजूद इसकी परंपराएं आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े हुए हैं।
यही वजह है कि हरेली को छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण लोकपर्व के रूप में देखा (Hareli Festival) जाता है। खेतों में पूजा से लेकर गेड़ी की मस्ती तक, यह तिहार प्रदेश की लोकसंस्कृति की एक ऐसी तस्वीर सामने लाता है जिसमें प्रकृति, किसान और गांव का जीवन साथ साथ दिखाई देता है।
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रिपोर्टर : ऐश कुमार साहू




