सीजी भास्कर, 13 अगस्त। नई दिल्ली: नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए आतंकी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले के पीछे अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) की भूमिका बताई गई है। संयुक्त राष्ट्र ने AQIS की बढ़ती गतिविधियों और उसके क्षेत्रीय नेटवर्क को लेकर भी चिंता जताई है। (Red Fort Attack)

AQIS के नेटवर्क को लेकर बढ़ी चिंता : Red Fort Attack
रिपोर्ट के मुताबिक AQIS ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए बड़े समूहों के बजाय छोटे और विकेंद्रीकृत सेल के जरिए गतिविधियां संचालित करने पर जोर दिया है। संगठन ने अपने लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क को भी मजबूत किया है। रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है कि AQIS बांग्लादेश में भी अपने नेटवर्क का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है।
लाल किले के पास हुए धमाके की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है। मई में दाखिल की गई चार्जशीट में भी अल-कायदा से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल की कथित भूमिका का उल्लेख किया गया था। जांच में आरोपियों द्वारा आतंकी गतिविधियों के लिए तकनीकी और डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी।
जांच एजेंसी ने इस मामले में करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें आरोपियों के बीच कथित संपर्क, आतंकी मॉड्यूल की गतिविधियों और हमले की साजिश से जुड़े कई पहलुओं का विवरण दिया गया था।
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जांच में आतंकी मॉड्यूल और डिजिटल संसाधनों का जिक्र
चार्जशीट के अनुसार, मामले में नामजद एक आरोपी कथित तौर पर आतंकी मॉड्यूल के तकनीकी कामकाज से जुड़ा था। जांच में यह भी दावा किया गया कि आरोपियों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल का इस्तेमाल तकनीकी जानकारी हासिल करने के लिए किया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, मामले में कुछ डॉक्टरों की कथित भूमिका भी सामने आई थी। इसके बाद संबंधित संस्थान और उससे जुड़े लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई। जांच में आरोपियों के बीच मुलाकात और कथित सहयोग से जुड़े कई तथ्य भी सामने आए।
10 नवंबर 2025 को दिल्ली में हुए विस्फोटक से भरे वाहन के धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे। मामले (Red Fort Attack ) में जांच एजेंसी ने कई आरोपियों को नामजद किया है और आतंकी साजिश से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में AQIS की गतिविधियों को लेकर सामने आया यह दावा मामले की जांच के बीच अहम माना जा रहा है। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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