सीजी भास्कर, 14 अगस्त। अंबिकापुर साइबर थाने में दर्ज एक बड़े साइबर फ्रॉड मामले की जांच को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशिक्षु IPS अधिकारी राहुल बंसल पर शिकायतकर्ता ने एक करोड़ रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद मामला CBI और न्यायालय तक पहुंच गया है। हालांकि, सरगुजा रेंज IG दीपक झा ने कहा है कि अब तक की जांच में IPS अधिकारी के खिलाफ रिश्वत मांगने या मामले में संलिप्तता का कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। (Rahul Bansal Bribery Allegation)
मामले में अलग-अलग राज्यों से अब तक 23 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि केस की कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए उससे एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी। उसने यह भी दावा किया कि रकम हवाला नेटवर्क के जरिए पहुंचाई गई और ASI प्रवीण कुमार राठौर तथा आरक्षक अंशुल शर्मा ने कथित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
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20.15 लाख की ऑनलाइन ठगी से जुड़ा मामला : Rahul Bansal Bribery Allegation
जानकारी के मुताबिक, हरियाणा निवासी आकाश कुमार के खिलाफ अंबिकापुर साइबर थाने में करीब 20.15 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी का मामला दर्ज है। शिकायतकर्ता ने दिल्ली की CBI कोर्ट में परिवाद दायर कर आरोप लगाया कि जांच के दौरान कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए प्रशिक्षु IPS राहुल बंसल से जुड़े लोगों के जरिए एक करोड़ रुपये की मांग की गई।
शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में बातचीत के स्क्रीनशॉट और ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा किया है। उसने IPS राहुल बंसल, ASI प्रवीण राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की मांग की है। इस शिकायत पर CBI कोर्ट ने तीनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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जांच प्रभावित न हो, इसलिए ASI-आरक्षक लाइन अटैच
सरगुजा रेंज IG दीपक झा के मुताबिक वायरल वीडियो, ऑडियो और पुलिसकर्मियों से जुड़े मोबाइल नंबरों की जांच अभी जारी है। जांच (Rahul Bansal Bribery Allegation) की निष्पक्षता प्रभावित न हो, इसलिए साइबर थाने में पदस्थ ASI प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा को पुलिस लाइन अटैच किया गया है।
IG ने बताया कि शिकायत में जिन मोबाइल नंबरों का उल्लेख है, वे राहुल बंसल के नंबर नहीं हैं। वहीं वायरल ऑडियो में मौजूद आवाज भी राहुल बंसल की नहीं पाई गई है। फिलहाल जांच जारी है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चूंकि मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है, इसलिए आगे की प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप तय की जाएगी।
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