सीजी भास्कर, 22 अगस्त : छत्तीसगढ़ में महिलाओं को संपत्ति का मालिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार की पहल का असर अब आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगा है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन (Women Property Ownership) को बढ़ावा देने के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का बड़ा असर हुआ है। एक साल में महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या में करीब 51 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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महिलाओं के नाम 30 हजार से ज्यादा दस्तावेज पंजीकृत Women Property Ownership
पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार 6 मई से 27 जुलाई 2026 के बीच महिलाओं के नाम 30 हजार 720 दस्तावेज पंजीकृत हुए। पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 20 हजार 319 थी। यानी एक साल में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन (Women Property Ownership) में करीब 51 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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विक्रय विलेखों में महिलाओं की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत
6 मई से 27 जुलाई 2025 के बीच कुल 63 हजार 174 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए थे। इनमें 20 हजार 319 दस्तावेज महिलाओं के पक्ष में थे। तब महिलाओं की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी। वर्ष 2026 में इसी अवधि में कुल 74 हजार 424 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए, जिनमें 30 हजार 720 दस्तावेज महिलाओं के नाम रहे। इससे महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई।
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75 प्रतिशत जिलों में 20% से ज्यादा बढ़ोतरी
महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन (Women Property Ownership) का असर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में देखने को मिला है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक करीब 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि हुई है। जांजगीर-चांपा, बालोद, कोरिया, रायपुर और कांकेर समेत कई जिलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रायपुर में महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेज 4,220 से बढ़कर 6,038 हो गए। बिलासपुर में यह संख्या 1,894 से बढ़कर 2,958 और जांजगीर-चांपा में 1,239 से बढ़कर 2,302 हो गई।
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76.95 करोड़ रुपये की मिली सीधी राहत
महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए दी गई 50 प्रतिशत शुल्क छूट से नागरिकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिला है। 6 मई से 27 जुलाई 2026 के बीच इस छूट के जरिए नागरिकों को 76 करोड़ 95 लाख 33 हजार 689 रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिला। यह राशि करीब 76.95 करोड़ रुपये है।
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महिला सशक्तिकरण को आर्थिक आधार देने पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें समान अवसर देना है। इसी उद्देश्य से महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में बढ़ोतरी इस पहल के सकारात्मक परिणामों को दिखाती है। संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ परिवार के महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भूमिका को मजबूत करता है।
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सामाजिक और आर्थिक सोच में आया बदलाव
वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई वृद्धि प्रदेश में सामाजिक और आर्थिक सोच में बदलाव का संकेत है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट ने परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित किया है।
सरकार का कहना है कि महिलाओं के नाम संपत्ति का बढ़ता स्वामित्व उनकी आर्थिक सुरक्षा और स्वावलंबन को मजबूत करेगा। साथ ही परिवार और समाज में उनकी निर्णय लेने की भूमिका भी मजबूत होगी। यह पहल सशक्त परिवार और सशक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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