सीजी भास्कर, 24 अगस्त। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के एक गांव में अधूरा पुल अब ग्रामीणों के लिए रोज की बड़ी परेशानी (Bridge Construction) बन गया है। बैगापारा में करीब छह महीने पहले पुल निर्माण के लिए पुरानी सड़क तोड़ दी गई थी, लेकिन काम अब तक पूरा नहीं हो सका। ऐसे में ग्रामीणों ने नाला पार करने के लिए लकड़ी और लोहे की पटरियों से अस्थाई रास्ता बना लिया है।
सबसे ज्यादा चिंता स्कूली बच्चों को लेकर है, जो रोज इसी संकरे और हिलने-डुलने वाले रास्ते से प्राथमिक स्कूल पहुंच रहे हैं। बारिश के दौरान नाले का पानी बढ़ने पर खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जल्द व्यवस्था नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

Bridge Construction अधूरा, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी Bridge Construction
मामला गौरेला ब्लॉक की धनौली ग्राम पंचायत के बैगापारा का है। यहां करीब छह महीने पहले नए पुल के निर्माण के लिए पुरानी सड़क और पुल की व्यवस्था को तोड़ दिया गया था।
निर्माण कार्य शुरू होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द नया पुल तैयार हो जाएगा, लेकिन अब तक काम अधूरा पड़ा है। इसके कारण गांव के लोगों को रोजाना नाला पार करने के लिए अस्थाई और जोखिम भरे रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है।
लकड़ी और लोहे की पटरी से पार कर रहे नाला
ग्रामीणों ने आवागमन पूरी तरह बंद होने से बचाने के लिए नाले के ऊपर लकड़ी और लोहे की पटरियां रखकर संकरा रास्ता तैयार किया है। यह व्यवस्था स्थायी नहीं है और इसके हिलने-डुलने से लोगों को संभलकर गुजरना पड़ता है।
बच्चे, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण इसी रास्ते से रोज आवाजाही कर रहे हैं। बारिश के दिनों में पानी का बहाव तेज होने से इस अस्थाई रास्ते से गुजरना और ज्यादा जोखिम भरा हो जाता है।
स्कूली बच्चों के लिए बढ़ा हादसे का खतरा Bridge Construction
प्राथमिक स्कूल जाने वाले बच्चे रोज इसी अस्थाई पुल का इस्तेमाल कर रहे हैं। रास्ता संकरा होने के कारण बच्चों को एक-दूसरे का सहारा लेकर या बेहद सावधानी से नाला पार करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी बढ़ने या संतुलन बिगड़ने की स्थिति में किसी बच्चे के नाले में गिरने का खतरा बना रहता है। इसलिए बारिश के मौसम में परिवारों की चिंता और ज्यादा बढ़ गई है।
वाहनों और एंबुलेंस की आवाजाही भी प्रभावित
अधूरा पुल केवल पैदल चलने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि वाहनों की आवाजाही के लिए भी बड़ी समस्या बन गया है। इस मार्ग से वाहन नहीं गुजर पाने के कारण ग्रामीणों को लंबा और मुश्किल रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को इलाज के लिए बाहर ले जाने में भी परेशानी हो रही है। आपात स्थिति में एंबुलेंस के गांव तक पहुंचने को लेकर भी ग्रामीणों को चिंता बनी रहती है।
सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से अधूरे Bridge Construction का काम जल्द पूरा कराने की मांग (Bridge Construction) की है। उनका कहना है कि पुल निर्माण में और देरी हुई तो बारिश के दौरान खतरा बढ़ सकता है।
ग्रामीणों ने स्थायी पुल तैयार होने तक नाला पार करने के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करने की भी मांग की है, ताकि बच्चों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर रोजाना इस अस्थाई रास्ते से न गुजरना पड़े।



