सीजी भास्कर, 17 अगस्त : अबूझमाड़ के बिनागुंडा गांव में नक्सलवाद (Abujhmarh Flag Controversy) का डर अब भी ग्रामीणों की जिंदगी पर असर डाल रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर ग्रामीणों ने तिरंगा फहराने से दूरी बनाए रखी। सुरक्षाबलों की मौजूदगी में गांव में ध्वजारोहण किया गया, लेकिन ग्रामीण झंडे के पास तक नहीं पहुंचे। यह स्थिति एक साल पहले तिरंगा फहराने वाले शिक्षक मनीष नूरेटी की हत्या के बाद बने डर को दिखाती है।
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तिरंगा फहराने पर शिक्षक की कर दी गई थी हत्या
मनीष नूरेटी की हत्या (Abujhmarh Flag Controversy) पिछले साल 15 अगस्त को हुई थी। ग्रामीणों के मुताबिक, मनीष ने स्कूल में बच्चों के साथ तिरंगा फहराया था और राष्ट्रगान कराया था। उसी शाम हथियारबंद नक्सली गांव पहुंचे और मनीष को स्कूल परिसर में ले जाकर ग्रामीणों के सामने उसके साथ मारपीट की।
इसके बाद नक्सली मनीष को कुछ दूरी पर ले गए, जहां उसकी हत्या कर दी गई। घटना के बाद से ग्रामीणों में नक्सलियों का डर और गहरा गया। इस बार स्वतंत्रता दिवस पर भी ग्रामीणों ने तिरंगा फहराने से खुद को दूर रखा।
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जंगल और नदी पार कर गांव पहुंची सुरक्षा टीम
बिनागुंडा गांव तक पहुंचने का रास्ता बेहद दुर्गम है। सुरक्षाबलों की टीम को उफनती नदी पार करने के साथ करीब 13 किलोमीटर लंबे पथरीले रास्ते से होकर गांव पहुंचना पड़ा। रास्ते में कई रपटें भी पार करनी पड़ीं।
बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से यहां आवागमन के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। गांव में फिलहाल एक शेड में स्कूल संचालित हो रहा है। मनीष नूरेटी की हत्या के बाद उनके चचेरे भाई मंगल नूरेटी को शिक्षक बनाया गया है।
ग्रामीणों में अब भी बना है नक्सली खौफ Abujhmarh Flag Controversy
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है। भूमिगत नक्सलियों की मौजूदगी के डर के कारण वे दोबारा किसी खतरे का सामना नहीं करना चाहते। यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर भी ग्रामीणों ने ध्वजारोहण से दूरी बनाए रखी।
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छह नक्सलियों की तलाश में 350 जवानों की 11 टीमें
मनीष नूरेटी की हत्या में शामिल बताए जा रहे छह नक्सली अब भी फरार हैं। इनमें चंदर करतलाम, मंगलू पद्दा, मंगेश परचाची, संनकी पुंगाटी, मनीष कोर्राम और रमशीला के नाम शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, इन पर अलग-अलग इनाम घोषित हैं।
फरार नक्सलियों की तलाश के लिए 350 जवानों की 11 टीमें काम कर रही हैं। इनमें महिला कमांडो की टीम भी शामिल है। सुरक्षाबलों की ओर से आसपास के गांवों में फरार नक्सलियों के पोस्टर भी लगाए जा रहे हैं।
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घने जंगल के कारण अब भी चुनौती
अधिकारियों के मुताबिक, नक्सलियों की सूचना मिलने पर सुरक्षा टीमें तत्काल मौके पर पहुंचती हैं। हालांकि घने जंगल और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण फरार आरोपियों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है।
सुरक्षाबलों के अभियानों के बाद इलाके में नक्सली गतिविधियों में कमी आई है। वर्ष 2024 में इस इलाके में 29 नक्सलियों के मारे जाने का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद बिनागुंडा में मनीष नूरेटी की हत्या की याद और फरार नक्सलियों का डर ग्रामीणों के बीच अब भी कायम है।
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