सीजी भास्कर, 17 अगस्त : दिसंबर में होने वाले नगर निगम चुनाव (Municipal Election) को लेकर रायपुर और दुर्ग जिले की राजनीति में अभी से हलचल तेज हो गई है। बिरगांव, भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरौदा नगर निगम में चुनाव की तैयारियां शुरू होते ही स्थानीय स्तर पर दावेदार सक्रिय होने लगे हैं। सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि कांग्रेस के कब्जे वाले इन निकायों में भाजपा इस बार कितना बड़ा उलटफेर कर पाती है।
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चारों नगर निगमों में बदलेंगे सियासी समीकरण
बिरगांव, भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरौदा में होने वाला चुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए अहम माना जा रहा है। पिछले चुनाव के समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, जबकि अब राज्य में भाजपा की सत्ता है। ऐसे में इन चुनावों के नतीजों को सरकार के कामकाज और दोनों दलों की स्थानीय पकड़ से जोड़कर भी देखा जाएगा। आरक्षण की अंतिम तस्वीर सामने आने के बाद टिकट के दावेदारों की सक्रियता और बढ़ने की उम्मीद है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही मजबूत उम्मीदवारों के जरिए अपने-अपने समीकरण साधने की कोशिश करेंगे।
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नगर निगम चुनाव में आरक्षण से बदलेगा गणित
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद जिला कलेक्टरों ने वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरक्षण तय होने के बाद कई संभावित दावेदारों की उम्मीदवारी पर असर पड़ सकता है। चारों नगर निगमों में फिलहाल कांग्रेस के पार्षदों की संख्या ज्यादा बताई गई है। ऐसे में भाजपा के सामने कांग्रेस के मौजूदा प्रभाव को चुनौती देने के साथ संगठन और उम्मीदवारों की ताकत दिखाने की चुनौती होगी।
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बिरगांव में महापौर पद का आरक्षण अहम
40 वार्डों वाले बिरगांव नगर निगम में कांग्रेस के नंदलाल देवांगन महापौर हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 21 वार्डों में जीत हासिल की थी। इस बार महापौर पद के आरक्षण ने पूरा समीकरण बदल दिया है। पिछली बार महापौर पद अनारक्षित था, जबकि इस बार इसे अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित किया गया है। आरक्षण के बाद दोनों दलों में संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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रिसाली में कांग्रेस के सामने भाजपा की चुनौती
रिसाली नगर निगम में कांग्रेस की शशि सिन्हा महापौर हैं। 40 वार्डों वाले इस निगम में कांग्रेस ने पिछले चुनाव में 21 वार्डों पर जीत हासिल की थी। क्षेत्र की राजनीति पर पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू का प्रभाव माना जाता है।
वहीं दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के ललित चंद्राकर विधायक हैं। ऐसे में नगर निगम चुनाव (Municipal Election) में स्थानीय राजनीतिक समीकरण और विधानसभा स्तर की पकड़ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भिलाई में बड़े राजनीतिक चेहरों की प्रतिष्ठा दांव पर
70 वार्डों वाले भिलाई नगर निगम में कांग्रेस के नीरज पाल महापौर हैं। यहां कांग्रेस के 37 पार्षद हैं, जबकि भाजपा के खाते में 24 वार्ड हैं। संख्या के लिहाज से कांग्रेस मजबूत स्थिति में है, लेकिन भाजपा इस अंतर को कम करने की कोशिश करेगी।
भिलाई नगर निगम का क्षेत्र भिलाई नगर और वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्रों तक फैला है। भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव हैं, जबकि वैशाली नगर से भाजपा के रिकेश सेन विधायक हैं। ऐसे में यहां निकाय चुनाव के साथ दोनों दलों की विधानसभा स्तर की ताकत की भी परीक्षा होगी।
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भिलाई-चरौदा में निर्दलीयों ने बनाया था समीकरण
भिलाई-चरौदा नगर निगम में पिछले चुनाव में कांग्रेस को 19 वार्डों में जीत मिली थी। पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। इसके बावजूद दो निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से कांग्रेस ने महापौर पद पर कब्जा कर लिया था।
यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गृह क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण भी कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इस बार दोनों दल पिछले चुनाव के समीकरणों को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार कर रहे हैं।
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दिसंबर में होगी सत्ता और संगठन की परीक्षा
दिसंबर में होने वाले इन चारों नगर निगमों के चुनाव में मुकाबला कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है। कांग्रेस अपने मौजूदा कब्जे को बचाने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा सत्ता में होने का फायदा उठाकर शहरी निकायों में अपनी पकड़ मजबूत करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।
आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी तस्वीर और साफ होगी। इसके साथ ही टिकट की दौड़ भी तेज होने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति में दावेदारों की सक्रियता और दोनों दलों की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।




