सीजी भास्कर, 03 सितंबर : लगातार बारिश के बीच करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए बांधों के टूटने (Dam Collapse) और बहने की घटनाओं ने सरकारी निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज दस दिनों के भीतर अलग-अलग इलाकों में तीन जल संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से बांध बहने की वजह और निर्माण में बरती गई सावधानियों को लेकर जांच की जरूरत बढ़ गई है।
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नींव की मजबूती पर सबसे बड़ा सवाल
किसी भी बांध की मजबूती में उसकी नींव सबसे अहम मानी जाती है। निर्माण के दौरान फाउंडेशन को डिजाइन के निर्धारित स्तर तक गहराई देना जरूरी होता है। साथ ही तेज बहाव और पानी के दबाव को सहने के लिए तय तकनीकी मानकों का पालन भी आवश्यक है।
पड़ताल में कुछ स्थानों पर नींव की गहराई और बेस तैयार करने के तरीके को लेकर सवाल सामने आए हैं। ऐसे में बांध टूटने (Dam Collapse) की घटनाओं के पीछे सिर्फ भारी बारिश जिम्मेदार है या निर्माण में भी खामी रही, इसकी जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
स्थानीय मिट्टी से बेस तैयार करने की बात
विशेषज्ञों के अनुसार नींव तैयार करने के बाद उपयुक्त मिट्टी से भराई और उसकी मजबूती सुनिश्चित करना जरूरी होता है। कुछ स्थानों पर स्थानीय मिट्टी से ही बेस तैयार किए जाने की बात सामने आई है। इससे बारिश के दौरान पानी के तेज दबाव में संरचना की मजबूती प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि अब बांध बहने (Dam Collapse) के मामलों में सिर्फ ऊपरी संरचना ही नहीं, बल्कि नींव से लेकर निर्माण सामग्री तक की जांच की जरूरत बताई जा रही है।
दस दिनों में तीन बांधों को नुकसान
मनैगांव-बिरसिंगे-भरतपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत मसरा स्थित अमझुड़ी बांध भारी बारिश के दौरान टूट गया। वहीं बलरामपुर जिले में जल ग्रहण मिशन के तहत बनाया गया तेतराई बांध करीब आठ दिन पहले क्षतिग्रस्त हुआ। बांध से पानी फैलने के कारण खेतों में पानी भर गया और धान की फसल को नुकसान हुआ।
इसके अलावा कौरिया जिले के छोटे सासली में करीब 1.5 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया बांध भी लगभग 15 दिन पहले फूट गया था। कम समय में तीन जल संरचनाओं के क्षतिग्रस्त होने से बांध टूटने (Dam Collapse) के मामलों ने निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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पुराने बांध और चूहों के बिल का दिया गया हवाला
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता अनिल खलावो के मुताबिक कई टैंक पुराने हो चुके हैं। बारिश के दौरान इनके बहने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि सभी मामलों की जांच कराई जा रही है।
वहीं चूहों के बिल को बांध टूटने की वजह बताए जाने पर मुख्य अभियंता ने कहा कि बिल किसके हैं, यह किसी ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहने वाले बांधों और एनीकट की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद ही Dam Collapse की वास्तविक वजह सामने आएगी।
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एक साल बाद भी चूटी बांध का सुधार नहीं
चूटी बांध को क्षतिग्रस्त हुए करीब एक साल बीत चुका है, लेकिन अब तक सुधार कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद सुधार कार्य कराया जाएगा।
अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि इन जल संरचनाओं के बांध बहने (Dam Collapse) के पीछे भारी बारिश, पुरानी संरचना या निर्माण में किसी तरह की तकनीकी कमी जिम्मेदार थी। विभाग ने जांच में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
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