सीजी भास्कर, 03 सितंबर : छत्तीसगढ़ अब सिर्फ खनिज और प्राथमिक प्रसंस्करण तक सीमित नहीं रहना चाहता। राज्य हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग (Chhattisgarh Manufacturing) और आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मा, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, रक्षा उपकरण, एआई और ग्रीन स्टील जैसे सेक्टर पर सरकार का फोकस बढ़ा है।
खनिज से तैयार उत्पाद तक बढ़ता फोकस
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य की औद्योगिक रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन पर जोर दिया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मा, रक्षा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसका लक्ष्य राज्य को केवल खनिज आपूर्तिकर्ता के बजाय तैयार उत्पादों और उन्नत तकनीक का केंद्र बनाना है। यही बदलाव छत्तीसगढ़ मैन्युफैक्चरिंग (Chhattisgarh Manufacturing) को नई दिशा दे रहा है।
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करीब 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
औद्योगिक नीति लागू होने के बाद निवेशकों की रुचि बढ़ी है। राज्य के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के अनुसार पिछले करीब 18 महीनों में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनसे 1.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर बनने की संभावना है।
इन निवेश प्रस्तावों में पारंपरिक उद्योगों के साथ एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। नवा रायपुर में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश प्रस्ताव आए हैं। वहीं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव राज्य की बदलती औद्योगिक तस्वीर दिखाते हैं।
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राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर
राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर यानी EMC 2.0 को मंजूरी मिली है। इससे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की उम्मीद है। परियोजना से करीब 9,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर (Chhattisgarh Manufacturing) में यह पहल छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सप्लाई चेन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
स्टील से ग्रीन स्टील की तरफ कदम
छत्तीसगढ़ पहले से ही स्टील उत्पादन के लिए जाना जाता है। अब राज्य ग्रीन स्टील की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित उत्पादन को बढ़ावा देने के बीच ग्रीन स्टील एक बड़ा अवसर बनकर उभरा है।
हाल ही में आयोजित छत्तीसगढ़ ग्रीन स्टील डायलॉग में करीब 13,840 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आईं। राज्य अपने खनिज, ऊर्जा और मौजूदा स्टील उद्योग के आधार का इस्तेमाल हाई-वैल्यू स्टील उत्पादों के निर्माण में कर सकता है।
फार्मा सेक्टर में भी निवेश बढ़ा
फार्मास्यूटिकल्स भी राज्य की नई औद्योगिक रणनीति का हिस्सा बन रहा है। पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र में करीब 992.53 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। इनमें 216 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट कार्यान्वयन के चरण में हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी देशभर में तेजी से निवेश हो रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर (Chhattisgarh Manufacturing) राष्ट्रीय सप्लाई चेन में मजबूत जगह बनाने का अवसर दे सकता है।
बस्तर-सरगुजा में स्थानीय संसाधनों पर जोर
औद्योगिक विकास की रणनीति बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों तक भी पहुंच रही है। वन उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर है।
इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ सकते हैं। संसाधनों का स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन ग्रामीण और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकता है।
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निवेश के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था मजबूत
निवेश को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था, SIPB और ऑनलाइन स्वीकृति तंत्र को मजबूत किया है। 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता आधारित सुविधाएं और त्वरित अनुमोदन की व्यवस्था की गई है।
छत्तीसगढ़ के पास खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक आधार पहले से मौजूद है। अब लक्ष्य इन संसाधनों से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाले उत्पाद तैयार करना है। एआई से इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन स्टील से फार्मा तक बढ़ता निवेश छत्तीसगढ़ मैन्युफैक्चरिंग (Chhattisgarh Manufacturing) की बदलती तस्वीर का संकेत दे रहा है।
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