सीजी भास्कर, 8 सितंबर : छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची (Chhattisgarhi Language 8th Schedule) में शामिल कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राज्यपाल रमेन डेका ने इस विषय पर सकारात्मक पहल करते हुए समिति गठित करने की बात कही है। समिति छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश और अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन करेगी।

राज्यपाल से छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने मुलाकात कर भाषा की प्राचीनता और समृद्ध साहित्यिक परंपरा से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब डेढ़ करोड़ लोग छत्तीसगढ़ी का प्रयोग करते हैं और यह प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा है। छत्तीसगढ़ी भाषा को मान्यता (Chhattisgarhi Language 8th Schedule) दिलाने की मांग को लेकर भाषाविदों ने संरक्षण, संवर्धन और विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।
राज्यपाल ने खुद पहल कर समिति बनाने की बात कही Chhattisgarhi Language 8th Schedule
लोक भवन में हुई मुलाकात के दौरान राज्यपाल रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के विषय पर सार्थक चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस दिशा में एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति भाषा से संबंधित ऐतिहासिक, साहित्यिक और भाषाई सामग्री को व्यवस्थित रूप से एकत्र करेगी।
राज्यपाल ने कहा कि इस काम के लिए विषय के विद्वानों और विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी एवं सुझाव भी लिए जाएंगे। उन्होंने असमिया और बोडो भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया। आठवीं अनुसूची में स्थान (Chhattisgarhi Language 8th Schedule) दिलाने की प्रक्रिया में दस्तावेजी और विशेषज्ञ सामग्री तैयार करने पर अब जोर रहेगा।
15वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की परंपरा का दावा
भाषाविदों ने राज्यपाल को बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध
परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना और पत्रकारिता सहित विभिन्न विधाओं में छत्तीसगढ़ी साहित्य की पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।
भाषाविदों के अनुसार छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तैयार हुआ था, जबकि पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में तैयार किया गया। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ। भाषाविदों ने पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ के प्रकाशन का भी उल्लेख किया। छत्तीसगढ़ी साहित्य की यह विरासत (Chhattisgarhi Language 8th Schedule) भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार के रूप में प्रस्तुत की गई।

विश्वविद्यालयों से स्कूलों तक छत्तीसगढ़ी की पढ़ाई
भाषाविदों ने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी का अध्ययन कराया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया भी जारी है।
भाषा के संरक्षण और नई पीढ़ी तक इसके विस्तार को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। भाषाविदों का कहना है कि छत्तीसगढ़ी के साहित्य, व्याकरण और शब्दकोश से जुड़ी सामग्री को व्यवस्थित तरीके से संकलित करना जरूरी है। इसी दिशा में प्रस्तावित समिति (Chhattisgarhi Language 8th Schedule) आगे काम करेगी।
भाषाविदों ने राज्यपाल को सौंपे भाषा से जुड़े तथ्य
मुलाकात के दौरान भाषाविदों ने छत्तीसगढ़ी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश और मानकीकरण की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ी को प्रदेश की राजभाषा और प्रमुख संपर्क भाषा बताते हुए इसके व्यापक इस्तेमाल का भी उल्लेख किया।
इस अवसर पर भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार शीलकांत पाठक और अर्चना पाठक उपस्थित थीं। छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल (Chhattisgarhi Language 8th Schedule) अब समिति के गठन और विशेषज्ञों से सामग्री जुटाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।




