सीजी भास्कर, 8 सितंबर : स्मार्ट मीटर की रीडिंग को लेकर उपभोक्ताओं की शंका दूर करने वाली बड़ी जानकारी सामने आई है (Smart Meter Chhattisgarh)। प्रदेशभर में 4,800 से अधिक परिसरों में स्मार्ट मीटर के साथ चेक मीटर लगाकर खपत का मिलान किया गया। परीक्षणों में स्मार्ट मीटर की रीडिंग सही पाई गई और बिना बिजली उपयोग के रीडिंग बढ़ने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
राजनांदगांव क्षेत्र में भी बिजली खपत से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। वितरण कंपनी के अनुसार स्मार्ट मीटरों की जांच तकनीकी मानकों के आधार पर की जा रही है। उपभोक्ताओं की संतुष्टि के लिए भिलाई की एन.ए.बी.एल. मान्यता प्राप्त लैब में उनके सामने 74 स्मार्ट मीटरों की जांच की गई, जिसमें सभी की रीडिंग सही मिली।

4800 से ज्यादा मीटरों की जांच
छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के अनुसार प्रदेशभर में 4,800 से अधिक परिसरों में स्मार्ट मीटर के साथ समानांतर चेक मीटर लगाए गए। दोनों मीटरों से दर्ज बिजली खपत का मिलान किया गया।
इन परीक्षणों में दोनों मीटरों की दर्ज खपत में समानता पाई गई। किसी स्मार्ट मीटर में तकनीकी त्रुटि या बिना बिजली उपयोग के रीडिंग बढ़ने का प्रमाण नहीं मिला। इससे स्मार्ट मीटर की रीडिंग (Smart Meter Chhattisgarh) को लेकर उठ रही शंकाओं को दूर करने का प्रयास किया गया है।
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BIS-CEA मानकों के अनुसार
आरडीएसएस के तहत प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर भारतीय मानक ब्यूरो और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप प्रमाणित हैं। कंपनी के अनुसार मीटर में बिजली खपत की गणना तय तकनीकी मानकों के अनुसार होती है।
वितरण कंपनी का कहना है कि मीटर की कार्यप्रणाली में मनमाने तरीके से रीडिंग बदलने या सॉफ्टवेयर के जरिए छेड़छाड़ की संभावना नहीं रहती। स्मार्ट मीटर की तकनीकी जांच (Smart Meter Chhattisgarh) इन्हीं मानकों के अनुरूप की जा रही है।
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चेक मीटर से मुफ्त जांच
अगर किसी उपभोक्ता को बिजली बिल या स्मार्ट मीटर की रीडिंग में गड़बड़ी का संदेह है तो वितरण कंपनी की तकनीकी टीम परिसर में जाकर जांच कर सकती है। उपभोक्ता के अनुरोध पर इलेक्ट्रॉनिक मीटर या चेक मीटर लगाकर दोनों की खपत का तुलनात्मक परीक्षण भी किया जाता है। इस जांच के लिए उपभोक्ता से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। उपभोक्ताओं को मीटर की मुफ्त जांच (Smart Meter Chhattisgarh) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
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74 मीटरों की लैब में जांच
भिलाई स्थित एन.ए.बी.एल. मान्यता प्राप्त टेस्टिंग लैब में उपभोक्ताओं की मौजूदगी में स्मार्ट मीटरों की जांच कराने का प्रावधान है। अब तक करीब 74 स्मार्ट मीटरों का लैब में परीक्षण किया जा चुका है।
कंपनी के अनुसार इन सभी मीटरों में बिजली खपत की रीडिंग सही पाई गई। लैब में स्मार्ट मीटर परीक्षण (Smart Meter Chhattisgarh) की यह प्रक्रिया उपभोक्ताओं के बीच भरोसा बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है।
बढ़ा बिल मतलब गलत मीटर नहीं
स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल बढ़ने का मतलब हमेशा मीटर की गलत रीडिंग नहीं होता। मौसम, तापमान और घरेलू उपकरणों के इस्तेमाल का बिजली खपत पर सीधा असर पड़ता है। एयर कंडीशनर, कूलर, वाटर पंप और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसे उपकरणों के अधिक उपयोग से भी खपत बढ़ सकती है।
राजनांदगांव क्षेत्र के चार जिलों में 2 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार मई 2026 की तुलना में अगस्त 2026 में बिजली खपत में 32 से 57 प्रतिशत तक की कमी दर्ज हुई। कंपनी ने मार्च से जून के दौरान बढ़ी खपत के प्रमुख कारणों में भारी विद्युत उपकरणों के अधिक इस्तेमाल को बताया है।
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खपत अब खुद देख सकेंगे
स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ता अपनी बिजली खपत की निगरानी खुद कर सकते हैं। ‘मोर बिजली’ मोबाइल ऐप और स्मार्ट मीटर वेब पोर्टल के माध्यम से प्रतिदिन की खपत के साथ हर 30 मिनट की खपत भी देखी जा सकती है।
इससे अनावश्यक या असामान्य बिजली इस्तेमाल का पता समय रहते लगाया जा सकता है। बिजली खपत की निगरानी (Smart Meter Chhattisgarh) से उपभोक्ता अपनी खपत को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकेंगे।
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शंका हो तो 1912 पर शिकायत
मीटर की रीडिंग या बिजली बिल को लेकर किसी भी तरह की शंका होने पर उपभोक्ता टोल-फ्री हेल्पलाइन 1912 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी विद्युत वितरण केंद्र में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
वितरण कंपनी के अनुसार शिकायत मिलने पर प्राथमिकता के आधार पर तकनीकी जांच और जरूरी समाधान उपलब्ध कराया जाएगा। स्मार्ट मीटर का उद्देश्य बिजली खपत की सटीक रिकॉर्डिंग के साथ उपभोक्ताओं को पारदर्शी और रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराना है।
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