सीजी भास्कर, 31 जुलाई। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। रायपुर, कबीरधाम, दुर्ग, बिलासपुर समेत कई जिलों से उपभोक्ताओं द्वारा बढ़े हुए बिजली बिल, अधिक रीडिंग और स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। (Smart Electricity Meter)
कई उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले उनका मासिक बिजली बिल 1800 से 2000 रुपए के बीच आता था, लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल दोगुना या तीन गुना तक पहुंच गया। इससे मध्यमवर्गीय और नौकरीपेशा परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।
रायपुर में कुछ ऐसे फ्लैटों के भी हजारों रुपए के बिजली बिल जारी होने के मामले सामने आए, जो लंबे समय से बंद थे। शिकायत के बाद बिजली कंपनी ने कुछ मामलों में बिलों में संशोधन भी किया। हालांकि बिजली कंपनी का कहना है कि मीटर और बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह सही है।
यह भी पढ़ें : CSPDCL Smart Meter : क्या स्मार्ट मीटर बढ़ जाता है बिजली का बिल? जानिए पूरा सच
बिजली कंपनी का पक्ष : Smart Electricity Meter
बिजली कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ता की वास्तविक बिजली खपत दर्ज करते हैं और उसी आधार पर बिल जारी किया जाता है। विभाग के अनुसार, मीटर या बिलिंग प्रणाली में किसी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी नहीं है।
यह भी पढ़ें : Chhattisgarh electricity bill late payment : बिजली बिल के लेट पेमेंट पर उपभोक्ताओं को राहत
बंद फ्लैट को भेज दिया हजारों का बिल
रायपुर के भावना नगर निवासी मनीष शर्मा ने बताया कि उनके फ्लैट में न तो कोई बल्ब लगा है और न ही पंखा। फ्लैट लंबे समय से बंद है। इसके बावजूद मई में करीब 15,500 रुपए और जून में लगभग 32 हजार रुपए का बिजली बिल जारी कर दिया गया।
मनीष ने पहले बिजली कंपनी में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन समाधान नहीं मिला। मामला मीडिया में आने के बाद विभाग ने जांच की और संशोधित बिल केवल 26 रुपए जारी किया।
यह भी पढ़ें : Electricity Tariff Hike : महंगी बिजली पर कांग्रेस का प्रदेशव्यापी घेराव, बिजली विभाग कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन

शिकायत पहुंची उपभोक्ता फोरम : Smart Electricity Meter
रायपुर के राजीव नगर निवासी एक उपभोक्ता ने स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (CGRF) में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि बिना स्पष्ट सहमति के मीटर बदला गया, जिसके बाद बिजली बिल में असामान्य अंतर आने लगा।
उपभोक्ता ने पुराने मीटर की जांच, नए स्मार्ट मीटर के तकनीकी परीक्षण और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल यह मामला फोरम में विचाराधीन है।
यह भी पढ़ें : Virtual Net Metering India : रायपुर से शुरू हुई सोलर क्रांति, अब अपार्टमेंट में भी सस्ती बिजली
कबीरधाम में मीटर उखाड़कर पहुंचे दफ्तर
कबीरधाम जिले के पांडातराई क्षेत्र में स्मार्ट मीटर के विरोध में कई उपभोक्ता अपने घरों से मीटर निकालकर बिजली विभाग के कार्यालय पहुंच गए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि विभाग पहले यह स्पष्ट करे कि स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है और बढ़े हुए बिलों की वजह क्या है। विरोध के बाद अधिकारियों ने लोगों से चर्चा कर उनकी शिकायतें सुनीं।
एक्सपर्ट की राय : Smart Electricity Meter
बिजली कंपनी के सेवानिवृत्त अधिकारी पी.एन. सिंह का कहना है कि बिजली बिल बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। उनका मानना है कि स्मार्ट मीटर से जुड़े कार्य कंपनी की सीधी निगरानी में होने चाहिए और मीटर खरीद व स्थापना के लिए पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में विवाद कम हों।
CSPDCL का दावा
विवाद के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद बिजली खपत में कमी दर्ज की गई है। विभाग के अनुसार, रायपुर के 3.11 लाख घरेलू उपभोक्ताओं की जून-जुलाई 2026 की तुलना में बिजली खपत 10.85 करोड़ यूनिट से घटकर 7.77 करोड़ यूनिट रह गई, यानी लगभग 28% की कमी आई है।
विभाग का यह भी दावा है कि 400 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं की खपत में करीब 44% तक कमी दर्ज की गई है। कंपनी के अनुसार, स्मार्ट मीटर बिजली की खपत नहीं बढ़ाते, बल्कि वास्तविक उपयोग का सटीक रिकॉर्ड दर्ज करते हैं।
कांग्रेस का आरोप : Smart Electricity Meter
स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर कांग्रेस लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है। पार्टी के नेता उपभोक्ताओं से मीटर वापसी के फॉर्म भरवा रहे हैं और सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक अभियान चला रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि बढ़े हुए बिजली बिल ‘महतारी वंदन योजना’ की रिकवरी का माध्यम बन गए हैं।
पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने भी स्मार्ट मीटर योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे उपभोक्ताओं पर जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार की घोषित नीति को छत्तीसगढ़ में भी लागू करने की मांग की।
अकबर ने कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अप्रैल 2026 में संसद में स्पष्ट किया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह वैकल्पिक व्यवस्था है और किसी भी उपभोक्ता की सहमति के बिना सामान्य मीटर को स्मार्ट मीटर में बदलना उचित नहीं है।
यह भी पढ़ें : Surya Ghar Yojana : छत्तीसगढ़ में रूफटॉप सोलर सिस्टम से उपभोक्ता हो रहे आत्मनिर्भर, बिजली बिल से मिल रही बड़ी राहत


